मध्य-पूर्व में जारी युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि वह ईरान को हथियार सप्लाई करता है, तो उसे “बड़े परिणाम” भुगतने होंगे। यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच हाल ही में घोषित नाजुक युद्धविराम के बावजूद स्थिति अभी भी संवेदनशील बनी हुई है।
दरअसल, एक पत्रकार द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में ट्रंप ने कहा, “अगर चीन ऐसा करता है, तो चीन को बड़ी समस्याएँ होंगी।” यह टिप्पणी रिपोर्ट्स के बाद आई है, जिनमें दावा किया गया था कि चीन आने वाले हफ्तों में ईरान को एयर डिफेंस सिस्टम उपलब्ध करा सकता है।
मीडिया रिपोर्ट्स, खासकर सीएनएन की एक रिपोर्ट में अमेरिकी खुफिया सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि ईरान युद्धविराम के इस विराम का इस्तेमाल अपनी सैन्य क्षमताओं, विशेषकर एयर डिफेंस सिस्टम को मजबूत करने के लिए कर रहा है। यह भी आशंका जताई गई है कि चीन तीसरे देशों के जरिए इस तरह की सैन्य सहायता पहुंचा सकता है।
उल्लेखनीय है कि हाल ही में छह सप्ताह तक चले संघर्ष के बाद अमेरिका और ईरान के बीच एक अस्थायी युद्धविराम लागू हुआ है। पाकिस्तान की मध्यस्थता में इस्लामाबाद में बातचीत भी हुई, लेकिन दोनों देशों के बीच किसी ठोस समझौते पर सहमति नहीं बन सकी, जिससे संघर्ष दोबारा भड़कने की आशंका बनी हुई है।
इन आरोपों के बीच चीन ने साफ तौर पर इन दावों को खारिज कर दिया है। चीन के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता झांग शियाओगांग ने कहा है कि बीजिंग न तो ईरान को हथियार दे रहा है और न ही इस तरह की कोई योजना है। उन्होंने कहा कि चीन निशाना बनाकर अटकलबाजी और गलत सूचना फैलाने का कड़ा विरोध करता है।
PTI की रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने उन खबरों का भी खंडन किया है, जिनमें कहा गया था कि चीनी कंपनियों ने अमेरिका-इजरायल युद्ध के दौरान ईरान को सैटेलाइट इमेजरी और सेमीकंडक्टर तकनीक उपलब्ध कराई थी। वहीं, अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर ने कहा कि अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक संबंध फिलहाल स्थिर हैं, लेकिन उन्होंने चीन को ईरान के साथ करीबी बढ़ाने से बचने की चेतावनी दी है।
ट्रंप ने यह भी संकेत दिया है कि जो देश ईरान को हथियार उपलब्ध कराएंगे, उनके खिलाफ 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगाए जा सकते हैं। यदि ऐसा होता है, तो अमेरिका-चीन के बीच चल रहा व्यापारिक संतुलन भी प्रभावित हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन भले ही सीधे तौर पर हथियार न भेजे, लेकिन ‘ड्यूल-यूज’ तकनीक के जरिए वह ईरान की सैन्य क्षमताओं को अप्रत्यक्ष रूप से मजबूत कर सकता है। ऐसे में यह मुद्दा आने वाले समय में वैश्विक कूटनीति और व्यापार दोनों पर असर डाल सकता है।
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