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Friday, October 23, 2026
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ईरान-अमेरिका शांति वार्ता विफल, 21 घंटे की बातचीत बेनतीजा

जेडी वेंस ने जताई निराशा

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ईरान और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित शांति वार्ता आखिरकार किसी ठोस नतीजे पर पहुंचे बिना समाप्त हो गई। करीब 21 घंटे तक चली इस उच्चस्तरीय बातचीत के बाद दोनों देशों के बीच प्रमुख मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी, जिससे मध्य-पूर्व में तनाव कम होने की उम्मीदों को झटका लगा है।

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने वार्ता विफल होने पर निराशा व्यक्त करते हुए कहा, “अब तक हम किसी नतीजे पर नहीं पहुंचे हैं। हमारे बीच कई मुद्दों पर असहमति है। यह बुरी खबर है कि उन्‍होंने हमारी शर्तें नहीं मानी हैं।” उन्होंने आगे कहा, “हमने ईरान को बेस्‍ट ऑफर दिया था, लेकिन वो मानने को तैयार नहीं हैं। इसलिए हम किसी समाधान तक नहीं पहुंच पाए हैं।”

इस बातचीत का मुख्य उद्देश्य मध्य-पूर्व में जारी तनाव को कम करना, लेबनान पर इजरायल के हमलों को रोकना और होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना था, ताकि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण पाया जा सके। हालांकि, इन सभी अहम मुद्दों पर दोनों देशों के बीच गहरे मतभेद सामने आए।

ईरान की ओर से विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबफ ने वार्ता में भाग लिया, जबकि अमेरिका की ओर से जेडी वेंस ने नेतृत्व किया। बैठक में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख असीम मुनीर भी मौजूद रहे।

वार्ता विफल होने के बाद ईरान ने भी अमेरिका पर कड़ा रुख अपनाया। ईरानी पक्ष ने कहा, “अमेरिकी की ओर से बहुत ज्‍यादा डिमांड रखी गई थीं, जिन्‍हें हम किसी भी कीमत पर मानने को तैयार नहीं थे।”

विशेषज्ञों के अनुसार, बातचीत टूटने की सबसे बड़ी वजह होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर विवाद रहा। ईरान इस रणनीतिक मार्ग पर अपना पूर्ण नियंत्रण चाहता है, जबकि अमेरिका ने इसे अंतरराष्ट्रीय मार्ग बताते हुए किसी भी प्रकार के एकाधिकार को खारिज कर दिया है। इस दौरान अमेरिकी युद्धपोतों की मौजूदगी ने भी स्थिति को और संवेदनशील बना दिया।

जेडी वेंस ने स्पष्ट किया, “सीधी बात यह है कि हम ये देखना चाहते थे कि वे परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश नहीं करेंगे और न ही वे ऐसे उपकरण हासिल करने की कोशिश करेंगे जो उन्हें जल्दी से परमाणु हथियार हासिल करने में सक्षम बना सकें, लेकिन वे ऐसा करने के लिए तैयार नहीं हैं।”

वार्ता के दौरान माहौल कई बार तनावपूर्ण भी रहा। ईरान ने अमेरिकी जहाजों को निशाने पर होने की चेतावनी दोहराई, वहीं अपने फ्रीज किए गए 6 अरब डॉलर के फंड को जारी करने की मांग भी रखी। दूसरी ओर, अमेरिका ने साफ किया कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगा।

इस घटनाक्रम के बीच पाकिस्तान ने उम्मीद जताई है कि भविष्य में वार्ता के जरिए समाधान निकाला जा सकता है। हालांकि, मौजूदा हालात को देखते हुए क्षेत्र में तनाव बढ़ने और वैश्विक तेल बाजार पर इसका असर पड़ने की आशंका बनी हुई है।

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