अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक सोशल मीडिया पोस्ट ने पाकिस्तान की सत्ता संरचना पर कौन काबिज़ है इसका खुलासा कर दिया है। ईरान युद्ध के बाद अब्राहम अकॉर्ड्स के विस्तार की वकालत करते हुए ट्रंप ने जिन वैश्विक नेताओं से बातचीत का दावा किया, उनमें पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर का नाम मुख्य रूप से लिया गया, लेकिन पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज़ शरीफ का कहीं उल्लेख नहीं किया गया।
ट्रंप की ट्रुथ सोशल पोस्ट में सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद, तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैय्यप एर्दोगान और मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतेह अल सीसी का उनके आधिकारिक पदों के साथ उल्लेख किया गया। लेकिन पाकिस्तान के निर्वाचित प्रधानमंत्री का नाम नहीं लिया गया।
इस घटनाक्रम ने पाकिस्तान में चर्चा को बल मिला है की देश की वास्तविक शक्ति आर्मी के हाथ में है, जबकि निर्वाचित सरकार केवल कठपुतली मात्र है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप की पोस्ट ने अप्रत्यक्ष रूप से यह संकेत दिया कि पाकिस्तान की विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों की डोर पाकिस्तानी सेना के हाथ में है।
दरअसल ट्रंप मुस्लिम बहुल देशों को अब्राहम अकॉर्ड्स के तहत औपचारिक रूप से इज़राइल को मान्यता देने के लिए राजी करने की कोशिश कर रहे हैं। यह समझौता उनके पहले कार्यकाल के दौरान शुरू हुआ था। रिपोर्ट्स के अनुसार सऊदी अरब, कतर, पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की जैसे देशों को इस क्षेत्रीय कूटनीतिक ढांचे में शामिल करने पर चर्चा चल रही है।
हालांकि पाकिस्तान के लिए यह प्रस्ताव बेहद संवेदनशील है। पाकिस्तान इस्लामी कलमा पढ़कर भारत के विभाजन के बाद निर्माण किया गया मुल्क है, जिसे आधिकारिक तौर पर ‘इस्लामी जमूरियाई पाकिस्तान’ कहा जाता है। एक इस्लामी मुल्क होने के नाते, यहाँ जिहाद, कट्टरपंथ और गैर-मुसलमानों से नफ़रत को संस्कृति का केंद्र बिंदु बनाया गया है। गैर-मुसलमान, खासकर हिंदू और यहूदियों के खिलाफ नफरत और अलगाव के प्रचार के कारण पाकिस्तान इजरायल को मान्यता देने के खिलाफ रहा है।
इस्लामाबाद का कहना है की फिलिस्तीन को स्वतंत्र राष्ट्र का दर्जा मिलने के बाद ही इज़राइल के साथ राजनयिक संबंधों पर विचार किया जा सकता है।
ऐसे में ट्रंप का प्रस्ताव पाकिस्तान सरकार के लिए एक कठिन संतुलन की स्थिति पैदा कर रहा है। यदि पाकिस्तान इज़राइल को मान्यता देने की दिशा में आगे बढ़ता है तो देश के भीतर भारी जन विरोध का सामना करना पड़ सकता है। वहीं दूसरी ओर अमेरिका के साथ रिश्तों को खराब करना भी इस्लामाबाद के लिए आसान नहीं होगा, खासकर तब जब अफगानिस्तान से अमेरिकी वापसी के बाद दोनों देशों के संबंध पहले ही तनावपूर्ण दौर से गुजर चुके हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने सप्ताहांत में पाकिस्तान और कई अरब देशों के नेताओं के साथ हुई एक उच्चस्तरीय कॉन्फ्रेंस कॉल के दौरान इज़राइल को व्यापक मान्यता देने का विचार रखा था। रिपोर्ट में दावा किया गया कि इस प्रस्ताव के बाद बातचीत में कुछ क्षणों के लिए सन्नाटा छा गया। बाद में ट्रंप ने मजाकिया अंदाज में पूछा कि क्या सभी लोग अभी भी कॉल पर मौजूद हैं।
ईरान, अफगानिस्तान और अमेरिका से जुड़े मामलों में मुनीर को प्रमुख निर्णयकर्ता के रूप में देखा जा रहा है। कुछ रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि मुनीर ने ट्रंप के करीबी राजनीतिक दायरे तक सीधी पहुंच बना ली है और पिछले वर्ष ट्रंप ने एक बंद कमरे की बैठक में उनकी सार्वजनिक रूप से प्रशंसा भी की थी। ऐसे में अब्राहमिक अकॉर्ड्स पर फैसला लेना मुनीर के लिए चुनौती बन चूका है।
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