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अमेरिका समर्थित शांति प्रस्ताव को यूक्रेन की मंजूरी; रूस और पुतिन के फैसले पर टिकी दुनिया की निगाहें

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रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के प्रयासों के तहत बर्लिन में दो दिनों तक चली उच्चस्तरीय वार्ता के बाद अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें रूस पर टिक गई हैं। अमेरिका समर्थित अंतिम शांति प्रस्ताव को आने वाले कुछ दिनों में रूस के समक्ष पेश किए जाने की तैयारी है और इसकी किस्मत काफी हद तक रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगी। यूक्रेन ने इस संशोधित प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है, जिससे कूटनीतिक हलचल और तेज हो गई है।

यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने मंगलवार(16 दिसंबर) को कहा कि संशोधित अमेरिकी प्रस्ताव को कुछ ही दिनों में रूस के सामने रखा जा सकता है। बर्लिन में हुई इस वार्ता में अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुश्नर ने जेलेंस्की और यूरोपीय नेताओं के साथ बैठकें कीं। इन बैठकों का उद्देश्य रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए एक साझा रूपरेखा तैयार करना था। हालांकि कई अहम मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं, लेकिन बातचीत में कुछ प्रगति होने की बात कही जा रही है।

इस प्रस्ताव की सबसे अहम बात यह है कि ट्रंप प्रशासन ने पहली बार नाटो के अनुच्छेद-5 की तर्ज पर यूक्रेन को सुरक्षा गारंटी देने का आश्वासन दिया है। रॉयटर्स के अनुसार, इन सुरक्षा गारंटियों को आर्टिकल 5 जैसी  व्यवस्था बताया गया है, जिसमें कड़ी निगरानी और संघर्ष-निरोधक तंत्र शामिल होगा, ताकि छोटे टकराव बड़े युद्ध में न बदलें। जेलेंस्की लंबे समय से इस बात पर जोर देते रहे हैं कि सुरक्षा गारंटी, बेहतर होगा यदि वे अमेरिकी कांग्रेस द्वारा कानून के रूप में पारित हों।

हालांकि, रूस की ओर से संकेत मिल रहे हैं कि वह इस प्रस्ताव को खारिज कर सकता है। ट्रंप प्रशासन द्वारा अब तक पेश किए गए तीनों प्रस्तावों को रूस पहले ही नकार चुका है, जबकि यूक्रेन ने उन्हें स्वीकार किया है। क्रेमलिन ने क्रिसमस के दौरान युद्धविराम के सुझाव को भी ठुकराते हुए साफ किया है कि उसके लक्ष्य पूरे होने तक युद्ध जारी रहेगा। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा, “हम शांति चाहते हैं। हम ऐसा संघर्षविराम नहीं चाहते, जिससे यूक्रेन को सांस लेने का मौका मिले और वह युद्ध को आगे बढ़ाने की तैयारी करे। हम इस युद्ध को समाप्त करना चाहते हैं, अपने लक्ष्यों को हासिल करना चाहते हैं और अपने हितों को सुरक्षित करना चाहते हैं।”

रूस के उप विदेश मंत्री सर्गेई रयाबकोव ने भी स्पष्ट किया है कि रूस युद्ध समाप्त करने के लिए किसी भी कब्जे वाले क्षेत्र को वापस नहीं करेगा और युद्ध के बाद यूक्रेन में नाटो शांति सैनिकों की तैनाती को स्वीकार नहीं करेगा। युद्ध के दौरान पुतिन लगातार अपने कठोर रुख पर कायम रहे हैं, जिसमें यूक्रेन की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से जुड़े मुद्दों पर कोई लचीलापन नहीं दिखता।

जहां एक ओर सुरक्षा गारंटियों को लेकर अमेरिका, यूक्रेन और यूरोपीय साझेदारों के बीच कुछ सहमति बनती दिख रही है, वहीं जमीन यानी क्षेत्रीय विवाद का सवाल अब भी सबसे बड़ी अड़चन बना हुआ है। ट्रंप यूक्रेन से पूरे डोनबास क्षेत्र को रूस को सौंपने की बात कर रहे हैं, जबकि जेलेंस्की ने मौजूदा युद्ध रेखा को स्थिर करने का प्रस्ताव दिया है। ऐसे में अब यह देखना अहम होगा कि रूस इस नए प्रस्ताव पर क्या रुख अपनाता है और क्या यह युद्ध वास्तव में समाप्ति की ओर बढ़ पाएगा।

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