भारत की आंतरिक सुरक्षा से जुड़े एक गंभीर मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने सात विदेशी नागरिकों को हिरासत में लिया है। इनमें एक अमेरिकी मर्सिनरी मैथ्यू आरोन वैन डाइक और छह यूक्रेनी नागरिक हुरबा पेट्रो, स्लिविएक तारास, इवान सुकमानोवस्की, स्टेफांकीव मारियन, होनचारुक मैक्सिम और कामिन्स्की विक्टर शामिल हैं। इन सभी को नई दिल्ली स्थित पटियाला हाउस की विशेष NIA अदालत ने 11 दिन की कस्टडी में भेजा गया है। यूक्रेन ने भारत के विदेश सचिव से इन आरोपियों के रिहाई की मांग की है। साथ ही यूक्रेन की ओर से अपने नागरिकों से संपर्क स्थापित करने के लिए काउंसलर एक्सेस की मांग की जा रही है।
NIA के अनुसार, प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि ये सभी आरोपी म्यांमार में सक्रिय जातीय सशस्त्र संगठनों के संपर्क में थे, जिनके पास AK-47 जैसे असॉल्ट राइफल मौजूद हैं। एजेंसी का दावा है कि आरोपियों ने न केवल इन समूहों से संबंध बनाए, बल्कि भारत में प्रतिबंधित उग्रवादी संगठनों को भी समर्थन दिया।
जांच एजेंसी के मुताबिक, सभी आरोपी वैध वीजा पर भारत आए थे, लेकिन बाद में मिजोरम जैसे संरक्षित क्षेत्र में बिना विशेष अनुमति के प्रवेश किया। इसके बाद उन्होंने कथित तौर पर भारत-म्यांमार सीमा पार की और वहां सक्रिय सशस्त्र संगठनों के साथ संपर्क स्थापित किया।
NIA ने यह भी आरोप लगाया है कि इन विदेशी नागरिकों ने म्यांमार में प्रशिक्षण लिया और कुछ मामलों में इन संगठनों को प्रशिक्षण भी दिया। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने यूरोप से ड्रोन की एक बड़ी खेप भारत में लाने में भूमिका निभाई, जिसका इस्तेमाल निगरानी या संभावित हमलों के लिए किया जा सकता था।
अदालत की कार्यवाही और जांच की दिशा
पटियाला हाउस कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए NIA को 11 दिन की कस्टडी दी है। अधिकारियों का कहना है कि इस दौरान पूरे नेटवर्क, अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन और भारत में सक्रिय उग्रवादी तंत्र से जुड़े पहलुओं की गहराई से जांच की जाएगी।
यूक्रेन के विदेश मंत्रालय के अनुसार, उसके छह नागरिकों को 13 मार्च 2026 को भारत में हिरासत में लिया गया। यूक्रेन का दावा है कि आरोप मुख्य रूप से मिजोरम में बिना अनुमति प्रवेश और भारत-म्यांमार सीमा पार करने से जुड़े हैं। साथ ही यूक्रेन ने यह भी कह रहा है की उसके नागरिकों की उग्रवादियों के साथ मिलकर प्रशिक्षण के कोई ठोस सबूत सामने नहीं आए है, जिससे यह साबित हो सके कि उसके नागरिक अवैध या आतंकवादी गतिविधियों में शामिल थे।
इस गिरफ्तारी के बाद यूक्रेन सरकार उल्टा चोर कोतवाल को डांटने की स्थिती बनाई है। यूक्रेन ने भारत पर ही आरोप लगाया कि नई दिल्ली स्थित उसके दूतावास को गिरफ्तारी की औपचारिक जानकारी समय पर नहीं दी गई। साथ ही, 16 मार्च को अदालत में मौजूद रहने के बावजूद दूतावास अधिकारियों को आरोपियों से मिलने की अनुमति नहीं दी गई।
यूक्रेन के राजदूत डॉ. ओलेक्सांद्र पोलिशचुक ने भारत के विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर तत्काल कांसुलर एक्सेस और आरोपियों की रिहाई की मांग की है।
यह मामला भारत की आंतरिक सुरक्षा, सीमापार उग्रवाद और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के जटिल मेल को दर्शाता है। भारत-म्यांमार सीमा लंबे समय से उग्रवादी गतिविधियों, हथियारों की तस्करी और अवैध नेटवर्क के लिए संवेदनशील मानी जाती रही है।
यदि NIA के आरोप सही साबित होते हैं, तो यह संकेत हो सकता है कि विदेशी नागरिक अब उग्रवादी संगठनों के लिए सहयोगी या ‘फोर्स मल्टीप्लायर’ की भूमिका निभा रहे हैं। यह न केवल भारत की सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है, बल्कि भारत-यूक्रेन संबंधों पर भी दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकता है।
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