एनकाउंटर की कार्रवाई में 11,834 अपराधी घायल हुए। वहीं अपराधियों से लोहा लेते हुए 18 पुलिसकर्मी शहीद हो गए, जबकि 1,852 पुलिसकर्मी घायल हुए।
सबसे अधिक मुठभेड़ मेरठ जोन में दर्ज की गई, जहां पुलिस ने 4,813 कार्रवाई की। इस कार्रवाई में 8,921 अपराधी दबोचे गए, जबकि 3,513 अपराधी घायल हुए। वहीं, 97 कुख्यात अपराधियों को मौके पर ही मार गिराया गया। मेरठ जोन की मुठभेड़ के दौरान 477 पुलिसकर्मी घायल हुए, जबकि अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए दो पुलिसकर्मी शहीद हुए। एनकाउंटर कार्रवाई में पूरे प्रदेश में मेरठ जोन पहले स्थान पर रहा है।
इसी तरह वाराणसी जोन में 1,292 मुठभेड़ हुई, जिनमें 2,426 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि 29 अपराधियों को मुठभेड़ में ढेर किया गया। इस दौरान 907 अपराधी और 104 पुलिसकर्मी घायल हुए।
एनकाउंटर आंकड़ों पर नजर डालें तो बरेली जोन में 2,222 मुठभेड़ों के दौरान 21 दुर्दांत अपराधियों को मार गिराया गया, वहीं लखनऊ जोन में 971 मुठभेड़ों के दौरान 20 अपराधी मारे गए। गाजियाबाद कमिश्नरी में 789 मुठभेड़ों में 18 अपराधी मारे गए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पिछले नौ वर्षों में यूपी पुलिस ने जीरो टॉलरेंस नीति को धरातल पर उतारा। इससे अपराधियों में भय और आम जनता में सुरक्षा की भावना बढ़ी है। यही वजह है कि प्रदेश की कानून-व्यवस्था की सराहना राष्ट्रीय स्तर पर हो रही है।
उत्तर प्रदेश में योगी सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत अपराधियों के खिलाफ चला यह नौ वर्षीय अभियान न सिर्फ आंकड़ों में बल्कि जमीनी हकीकत में भी कानून का राज स्थापित करने में सफल रहा है। पुलिस की त्वरित, कठोर और साहसिक कार्रवाई ने अपराधियों को प्रदेश छोड़ने पर मजबूर कर दिया है और उत्तर प्रदेश अब भयमुक्त और सुरक्षित राज्य के रूप में अपनी पहचान को सशक्त कर रहा है।
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