पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में मंत्रिमंडल ने मदरसा विभाग और सूचना एवं सांस्कृतिक विभाग के अंतर्गत चल रही धर्म-आधारित सहायता योजनाओं को चरणबद्ध तरीके से बंद करने का निर्णय लिया है। साथ ही महिलाओं के लिए 3,000 रुपये की आर्थिक सहायता को भी मंजूरी दी गई है। यह जानकारी शहरी विकास मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने दूसरी मंत्रिमंडल बैठक के बाद मीडिया को दी।
सोमवार (18 मई) को मंत्रिमंडल ने मदरसा विभाग और सूचना एवं सांस्कृतिक विभाग के अंतर्गत संचालित धर्म-आधारित सहायता योजनाओं को बंद करने का निर्णय लिया। हालांकि, वर्तमान में चल रही परियोजनाएं इस महीने के अंत तक जारी रहेंगी और उसके बाद उन्हें धीरे-धीरे बंद किया जाएगा।
इसके साथ ही सरकार ने ‘अन्नपूर्णा योजना’ को भी मंजूरी दी है, जिसके तहत भाजपा के चुनावी घोषणा पत्र के वादे के अनुसार 1 जून से महिलाओं को 3,000 रुपये की सहायता दी जाएगी। लक्ष्मी भंडार योजना के तहत पहले से लाभ ले रही महिलाओं को स्वतः इस योजना में शामिल किया जाएगा, जबकि वर्तमान योजना में शामिल नहीं महिलाओं के लिए एक नया पोर्टल शुरू किया जाएगा।
सरकार ने 1 जून से राज्यभर में महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा की भी घोषणा की है।
सोमवार को शुभेंदु अधिकारी ने पदभार संभालने के बाद अपना पहला जनता दरबार आयोजित किया और सॉल्ट लेक स्थित भाजपा कार्यालय में लोगों की मांगें और शिकायतें सुनीं। एक पार्टी नेता ने बताया कि 9 मई को राज्य के पहले भाजपा मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने वाले अधिकारी ने नियमित रूप से ऐसे सार्वजनिक सुनवाई सत्र आयोजित करने का निर्णय लिया है। छात्रों सहित कई लोगों ने मुख्यमंत्री के साथ इस संवाद में भाग लिया।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब पश्चिम बंगाल भाजपा ने 9 मई से 16 मई तक अपने शासन के पहले सप्ताह में राज्य की “डबल इंजन” सरकार द्वारा लिए गए प्रमुख फैसलों और उठाए गए कदमों को भी उजागर किया। ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में पश्चिम बंगाल भाजपा ने कहा कि नई सरकार के पहले ही सप्ताह में कई बड़े फैसले और प्रभावी कदम उठाए गए हैं। पार्टी ने कहा, “टीएमसी के नेतृत्व में पश्चिम बंगाल जो 15 वर्षों में हासिल नहीं कर पाया, उसे डबल इंजन सरकार ने अपने पहले ही सप्ताह में दिखाना शुरू कर दिया है। यही नया पश्चिम बंगाल है और यही वास्तविक शासन की गति है।”
शुभेंदु अधिकारी द्वारा पहला जनता दरबार आयोजित करने और भाजपा द्वारा सरकार के पहले सप्ताह की उपलब्धियों को प्रस्तुत करने के साथ पार्टी ने संकेत दिया है कि जनसुनवाई और त्वरित प्रशासनिक कार्रवाई उनके राजनीतिक संदेश का महत्वपूर्ण हिस्सा होंगे।
सरकार ने यह भी निर्णय लिया है कि जून से धार्मिक वर्गीकरण के आधार पर समूहों को दी जाने वाली सरकारी सहायता बंद कर दी जाएगी। सूचना एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग तथा अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा विभाग के माध्यम से धार्मिक आधार पर चल रही योजनाएं इस महीने के अंत तक जारी रहेंगी, जिसके बाद उन्हें समाप्त कर दिया जाएगा। इसके लिए अलग से अधिसूचना जारी की जाएगी।
गौरतलब है कि 2012 में तत्कालीन राज्य सरकार ने पश्चिम बंगाल के इमामों के लिए मासिक मानदेय की घोषणा की थी। इस योजना के तहत पंजीकृत इमामों को हर महीने 2,500 रुपये दिए जाते थे, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर धार्मिक नेताओं को सहायता मिल सके।
इसके तुरंत बाद, मस्जिदों में नमाज के लिए लोगों को बुलाने वाले मुअज्जिनों के लिए भी इसी प्रकार की आर्थिक सहायता योजना शुरू की गई थी। इन दोनों योजनाओं का वित्तपोषण अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा किया जाता था। इसके बाद 2020 में, तत्कालीन राज्य सरकार ने हिंदू पुजारियों के लिए भी इसी तरह का भत्ता शुरू किया। इस योजना के तहत पंजीकृत पुरोहितों को मासिक मानदेय दिया जाता था, जिसे शुरू में 1,000 रुपये निर्धारित किया गया था और बाद में 2026 विधानसभा चुनावों से पहले बढ़ाकर 2,000 रुपये कर दिया गया था।
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