अमेरिकी कांग्रेस (अमेरिकी संसद) के समक्ष पेश की गई एक नई रिपोर्ट ने एक बार फिर पाकिस्तान की धरती पर सक्रिय आतंकी नेटवर्क को दुनिया के सामने बेनकाब किया हैं। कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस की ओर से 25 मार्च को प्रस्तुत की गई “टेररिस्ट एंड अदर मिलिटेंट ग्रुप्स इन पाकिस्तान” रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान न केवल आतंकवादी संगठनों का ठिकाना बना हुआ है, बल्कि इनमें से कई संगठन भारत को निशाना बनाने और जम्मू-कश्मीर के विलय की साजिश में सक्रिय हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 1980 के दशक से सक्रिय कई गैर-राज्य तत्व आज भी पूरी क्षमता के साथ काम कर रहे हैं, जबकि पाकिस्तान की सैन्य और खुफिया कार्रवाइयां इन्हें खत्म करने में विफल रही हैं।
रिपोर्ट में पाकिस्तान से संचालित आतंकी संगठनों को वैश्विक स्तर पर सक्रिय, अफगानिस्तान केंद्रित, भारत और कश्मीर पर लक्षित आतंकी संघठन, घरेलू आतंकी संगठन और शिया समुदाय को निशाना बनाने वाले सांप्रदायिक संगठन इन पांच प्रमुख श्रेणियों में बांटा गया है।
कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस ने कुल 15 संगठनों का अध्ययन कर बताया की इनमें से 12 को अमेरिकी कानून के तहत विदेशी आतंकी संगठन घोषित किया जा चुका है। यह वर्गीकरण पाकिस्तान में सक्रिय आतंकवाद के व्यापक दायरे को दर्शाता है।
रिपोर्ट में लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद, हिज्बुल मुजाहिदीन, हरकत-उल-मुजाहिदीन और हरकत-उल-जिहाद-इस्लामी जैसे संगठनों का विशेष उल्लेख किया गया है। हाफिज सईद की अगवाई में काम करने वाला ISI संचालित लश्कर-ए-तैयबा को एक संगठित और बड़े नेटवर्क वाला आतंकी संगठन बताया गया है, जिसने 2008 के मुंबई हमलों सहित कई बड़े हमलों को अंजाम दिया। साथ ही मसूद अजहर द्वारा स्थापित जैश-ए-मोहम्मद को जम्मू-कश्मीर को पाकिस्तान में मिलाने की मंशा रखने वाला प्रमुख संगठन बताया गया है। यह संगठन 2001 में भारतीय संसद पर हमले में भी शामिल रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान द्वारा किए गए सैन्य अभियान और खुफिया ऑपरेशन इन आतंकी नेटवर्क को खत्म करने में सफल नहीं रहे। लाखों ऑपरेशनों के बावजूद संयुक्त राष्ट्र और अमेरिका द्वारा प्रतिबंधित संगठन अब भी पाकिस्तान में सक्रिय हैं। यह निष्कर्ष पाकिस्तान की आतंकवाद विरोधी नीति की प्रभावशीलता और उसकी मंशा दोनों पर सवाल खड़े करता है।
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान खुद भी आतंकवाद से प्रभावित रहा है। 2025 में आतंकवाद से जुड़ी मौतों की संख्या 4,001 तक पहुंच चुकी है, जो पिछले एक दशक में सबसे अधिक है। रिपोर्ट में अल-कायदा, इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत (ISKP) और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) जैसे संगठनों की मौजूदगी और उनके नेटवर्क का भी जिक्र किया गया है। अफगान तालिबान और हक्कानी नेटवर्क जैसे समूहों की गतिविधियों को भी पाकिस्तान से जुड़े ठिकानों से संचालित बताया गया है, हालांकि पाकिस्तान इन आरोपों से इनकार करता रहा है।
हालांकि रिपोर्ट में विस्तृत जानकारी दी गई है, लेकिन कुछ तथ्यों को लेकर सवाल भी उठे हैं। उदाहरण के लिए, मसूद अजहर को कश्मीरी नेता बताया गया है, जबकि वह पाकिस्तान के पंजाब क्षेत्र से संबंधित है। इसी तरह हिज्बुल मुजाहिदीन के कैडर को मुख्य रूप से स्थानीय कश्मीरी बताना भी जमीनी हकीकत से पूरी तरह विपरीत है।
रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार निगरानी में बना हुआ है। 2018 से उसे धार्मिक स्वतंत्रता कानून के तहत “कंट्री ऑफ पार्टिकुलर कंसर्न” की सूची में रखा गया है। अमेरिकी विदेश विभाग की रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान ने कुछ कदम जरूर उठाए हैं, लेकिन इस्लामी कट्टरपंथ और आतंकी विचारधाराओं को बढ़ावा देने वाले ढांचे अब भी चिंता का विषय बने हुए हैं।
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