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अमेरिकी अदालत ने ट्रंप के पोर्टलैंड में नेशनल गार्ड भेजने के आदेश पर लगाई रोक

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अमेरिका में संघीय न्यायाधीश ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस फैसले पर अस्थायी रोक लगा दी है, जिसके तहत वे पोर्टलैंड में 200 नेशनल गार्ड सैनिकों को तैनात करना चाहते थे। खुद ट्रंप की नियुक्त ओरेगन की यूएस डिस्ट्रिक्ट जज कैरिन जे. इमर्गट ने शनिवार (4 अक्टूबर)को यह आदेश जारी किया। ओरेगन राज्य और पोर्टलैंड प्रशासन ने ट्रंप सरकार के खिलाफ यह याचिका दायर की थी। अदालत का यह अस्थायी आदेश 18 अक्तूबर तक लागू रहेगा, जिसे बाद में बढ़ाया जा सकता है।

जज इमर्गट ने अपने आदेश में लिखा, “अमेरिकी संविधान के अनुसार, केवल कांग्रेस को यह अधिकार है कि वह ‘मिलिशिया’ यानी सैनिक बलों को कानून लागू करने, विद्रोह दबाने या किसी बाहरी हमले से देश की रक्षा के लिए बुला सके।” उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन द्वारा संवैधानिक अधिकार के बिना नेशनल गार्ड को संघीय नियंत्रण में लेना ओरेगन की संप्रभुता का उल्लंघन है। उन्होंने आगे कहा, “इस देश की पुरानी परंपरा सरकार की अति-सत्ता के खिलाफ खड़ी होने की रही है.  खासकर जब सेना को नागरिक मामलों में दखल देने के लिए इस्तेमाल किया जाए। यह राष्ट्र संविधान के शासन पर चलता है, न कि मार्शल लॉ पर।”

ट्रंप प्रशासन को बड़ा झटका

जज का यह फैसला फिलहाल अस्थायी है, लेकिन उन्होंने यह भी माना कि याचिकाकर्ताओं के पास इस मामले में सफलता की संभावना है, इसलिए रोक लगाना आवश्यक है। इससे ट्रंप प्रशासन के 28 सितंबर के उस मेमो पर रोक लग गई है, जिसमें ओरेगन नेशनल गार्ड को संघीय नियंत्रण में लेकर पोर्टलैंड भेजने का आदेश दिया गया था। ओरेगन की गवर्नर टीना कोटेक ने फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “न्याय की जीत हुई है, और सच्चाई सामने आई है। पोर्टलैंड में कोई विद्रोह नहीं है, कोई राष्ट्रीय सुरक्षा खतरा नहीं है, कोई आगजनी या बमबारी नहीं हो रही। हमारे लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हैं।”

अपील की तैयारी में व्हाइट हाउस

व्हाइट हाउस की प्रवक्ता एबिगेल जैक्सन ने संकेत दिया कि ट्रंप प्रशासन इस आदेश को चुनौती दे सकता है। उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप ने पोर्टलैंड में संघीय संपत्तियों और कर्मियों की सुरक्षा के लिए वैध अधिकार का प्रयोग किया है। हमें उम्मीद है कि ऊपरी अदालत में हमारा पक्ष मजबूत साबित होगा।” इस निर्णय को ट्रंप प्रशासन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, जो डेमोक्रेटिक शासन वाले कुछ शहरों में सेना की तैनाती करना चाहता था।

बीते महीने कैलिफोर्निया की एक संघीय अदालत ने भी ट्रंप प्रशासन के खिलाफ ऐसा ही निर्णय दिया था। सैन फ्रांसिस्को के जज चार्ल्स ब्रेयर ने कहा था कि लॉस एंजेलिस में नेशनल गार्ड और मरीन की तैनाती “Posse Comitatus Act” का उल्लंघन है। यह 1878 का कानून है, जो राष्ट्रपति को घरेलू पुलिस बल के रूप में सेना के इस्तेमाल से रोकता है।

अमेरिका में ट्रंप के इस कदम को लेकर राजनीतिक और कानूनी बहस तेज हो गई है, क्योंकि आलोचक इसे संघीय सत्ता के दुरुपयोग के रूप में देख रहे हैं।

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