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अमेरिकी अदालत में ट्रंप के टैरिफ ‘गैरकानूनी’; ट्रंप बोले “पूरी तरह तबाही”

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने IEEPA का सहारा लेकर संविधान की सीमाओं को पार किया।

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अमेरिका की फेडरल सर्किट कोर्ट ऑफ अपील्स ने शुक्रवार (28 अगस्त)को एक बड़ा फैसला सुनाते हुए डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए अधिकांश टैरिफ को गैरकानूनी करार दिया। अदालत ने कहा कि ट्रंप ने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का दुरुपयोग किया है, जबकि अमेरिकी संविधान के अनुसार कर और टैरिफ लगाने का अधिकार केवल कांग्रेस को है।

हालांकि फैसले के बावजूद, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया कि सभी टैरिफ यथावत लागू रहेंगे। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, “सभी टैरिफ अभी भी प्रभावी हैं! एक बेहद पक्षपातपूर्ण अपील कोर्ट ने आज गलत तरीके से कहा कि हमारे टैरिफ हटा दिए जाएं। लेकिन वे जानते हैं कि आखिरकार अमेरिका जीतेगा। अगर ये टैरिफ हटे तो यह देश के लिए पूरी तरह आपदा साबित होगा।”

ट्रंप ने तर्क दिया कि टैरिफ हटाने से अमेरिकी उद्योग ध्वस्त हो जाएंगे, देश विदेशी प्रतिस्पर्धा के सामने कमजोर हो जाएगा और अंततः यह “अमेरिका को नष्ट कर देगा।” अदालत ने अपने फैसले में कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने IEEPA का सहारा लेकर संविधान की सीमाओं को पार किया। फैसले में लिखा गया, “केवल कांग्रेस के पास ही टैरिफ और कर लगाने का संवैधानिक अधिकार है।”

हालांकि अदालत ने यह भी आदेश दिया कि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक टैरिफ प्रभावी बने रहेंगे, जिससे व्हाइट हाउस को सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का मौका मिलेगा। व्हाइट हाउस प्रेस सचिव कुश देसाई ने ट्रंप का बचाव करते हुए कहा,“राष्ट्रपति ने कांग्रेस द्वारा प्रदत्त अधिकारों का कानूनी रूप से इस्तेमाल किया है ताकि राष्ट्रीय और आर्थिक सुरक्षा को विदेशी खतरों से बचाया जा सके। टैरिफ कायम रहेंगे और हम इस मुद्दे पर अंतिम जीत के लिए आश्वस्त हैं।”

वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने पहले कहा था कि प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के साथ टैरिफ पर बातचीत लेबर डे तक पूरी हो सकती है, लेकिन अदालत के इस फैसले से अब यह प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

यह फैसला खासतौर पर उन “रेसिप्रोकल” और चीन, मेक्सिको व कनाडा पर लगाए गए टैरिफ से जुड़ा है, जिन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा और फेंटेनाइल की तस्करी रोकने में नाकामी का हवाला देकर लागू किया गया था। हालांकि स्टील और एल्युमिनियम पर 1962 और 1974 के कानूनों के तहत लगाए गए टैरिफ इस दायरे में नहीं आते।

दिलचस्प रूप से, निवेश बैंक जेफरीज की एक हालिया रिपोर्ट में कहा गया था कि ट्रंप ने भारत पर 50% तक के टैरिफ आंशिक रूप से इस वजह से लगाए क्योंकि नई दिल्ली ने बार-बार भारत-पाकिस्तान विवाद में उनकी मध्यस्थता की पेशकश को ठुकराया। रिपोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि भारत का कृषि क्षेत्र दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ताओं में लगातार अड़चन बना हुआ है।

अब ट्रंप प्रशासन इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगा। चूंकि नौ में से छह न्यायाधीश रूढ़िवादी झुकाव वाले हैं, जिनमें तीन खुद ट्रंप द्वारा नामित किए गए, इससे व्हाइट हाउस को अनुकूल निर्णय की उम्मीद है। लेकिन फिलहाल, ये टैरिफ लागू हैं और वैश्विक बाजारों में अमेरिकी व्यापार नीति को लेकर अनिश्चितता और तनाव बरकरार है।

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