अमेरिका-इजरायल का ‘ऑपरेशन शील्ड ऑफ जुदाह’ शुरू, तेहरान में जोरदार धमाके

अमेरिका-इजरायल का ‘ऑपरेशन शील्ड ऑफ जुदाह’ शुरू, तेहरान में जोरदार धमाके

US-Israeli Operation Shield of Judah begins, powerful explosions in Tehran

अमेरिका और इजराइल ने शनिवार (28 फरवरी) को ईरान के खिलाफ संयुक्त सैन्य कार्रवाई शुरू की, जिसे “ऑपरेशन शील्ड ऑफ जुदाह” नाम दिया गया है। इस दौरान ईरान की राजधानी तेहरान सहित छह शहरों पर बड़े पैमाने पर विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। इजरायल ने इसे निवारक मिसाइल हमला बताया है। इससे पहले वॉशिंगटन और तेहरान के बीच संघर्ष टालने के लिए कूटनीतिक प्रयास जारी थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हमले में कई सरकारी ढांचों को निशाना बनाया गया, जिनमें राष्ट्रपति भवन परिसर भी शामिल है। ईरान के सर्वोच्च नेता अली ख़ामेनेई को एहतियातन सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित किए जाने की खबर है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सर्वोच्च नेता के कार्यालय के अलावा खुफिया मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, ईरानी परमाणु ऊर्जा एजेंसी और परचिन सैन्य परिसर जैसे प्रमुख ठिकानों को निशाना बनाया गया। स्थानीय मीडिया के हवाले से बताया जा रहा है की हमलों के बाद कई इलाकों में इमारतों से घना धुआं उठता देखा गया और लोग सुरक्षित स्थानों की ओर भागते नजर आए।

इजरायल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज़  ने बयान जारी कर कहा,“इज़राइल राज्य ने इज़रायल राज्य के लिए खतरों को दूर करने के लिए ईरान के खिलाफ एक निवारक हमला किया है।” इजरायली रक्षा अधिकारियों ने बताया कि यह अभियान अमेरिका के साथ समन्वय में चलाया गया।

हमले के बाद तेहरान के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में मोबाइल फोन सेवाएं बंद कर दी गई हैं और ईरान ने अपना हवाई क्षेत्र अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। संभावित जवाबी कार्रवाई की आशंका को देखते हुए इजरायल ने देशभर में आपातकाल की घोषणा कर दी है। सेना ने कहा कि इसराइल की ओर मिसाइल दागे जाने की संभावना के लिए जनता की तैयारी के मद्देनजर कई इलाकों में एहतियातन एयर रेड सायरन बजाए गए हैं।

सैन्य प्रवक्ता ने शैक्षणिक गतिविधियों, समारोहों और कार्यस्थलों पर प्रतिबंध की भी घोषणा की है, हालांकि आवश्यक सेवाओं को इससे छूट दी गई है। वहीं कतर स्थित अमेरिकी दूतावास ने अपने कर्मियों के लिए ‘शेल्टर-इन-प्लेस’ प्रोटोकॉल लागू किया है और नागरिकों को भी अगली सूचना तक यही करने की सलाह दी है।

यह हमला जून में हुए 12 दिन के हवाई संघर्ष के महीनों बाद हुआ है, जिसे दोनों देशों के बीच सबसे प्रत्यक्ष टकरावों में से एक माना गया था। हाल के महीनों में अमेरिका और इजरायल ने चेतावनी दी थी कि यदि ईरान अपने परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों को आगे बढ़ाता रहा तो सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू हो सकती है।

फरवरी में वॉशिंगटन और तेहरान ने दशकों पुराने विवाद को कूटनीतिक तरीके से सुलझाने के लिए वार्ता फिर शुरू की थी। इजरायल ने स्पष्ट किया है कि किसी भी समझौते में ईरान के परमाणु ढांचे को पूरी तरह ध्वस्त करने और उसकी मिसाइल क्षमताओं पर रोक शामिल होनी चाहिए। दूसरी ओर, ईरान ने कहा है कि वह प्रतिबंधों में राहत के बदले परमाणु गतिविधियों पर सीमाओं पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन अपने मिसाइल कार्यक्रम पर बातचीत से इनकार किया है।

यह भी पढ़ें:

पश्चिम बंगाल: चार माह की SIR प्रक्रिया के बाद आज जारी होगी अंतिम मतदाता सूची

अफगान तालिबान के खिलाफ पाकिस्तान को अमेरिका से मिला समर्थन

ईरान पर इजरायल और अमेरिका के हमले: खामेनेई के दफ्तर पर धमाका

Exit mobile version