अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि उनका प्रशासन अफगानिस्तान के बगराम एयरबेस को दोबारा अपने नियंत्रण में लेने की कोशिश कर रहा है। यह वही एयरबेस है जिसे 2021 में अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की अराजक वापसी के दौरान तालिबान के हाथों में छोड़ दिया गया था।
ब्रिटेन के चेकर्स में प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के साथ संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने कहा, “दुनिया के सबसे बड़े एयरबेस में से एक, हमने उन्हें बिना कुछ लिए दे दिया। हम इसे वापस लेने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें हमसे चीजें चाहिए। हम वह बेस वापस चाहते हैं। एक वजह यह भी है कि यह चीन के परमाणु हथियार बनाने वाली जगह से सिर्फ एक घंटे की दूरी पर है।”
चीन पर फोकस
ट्रंप ने बार-बार यह कहा है कि बगराम एयरबेस केवल अफगानिस्तान के लिहाज से नहीं, बल्कि चीन पर निगरानी के लिहाज से बेहद अहम है। फरवरी में अपनी पहली कैबिनेट बैठक में भी उन्होंने कहा था कि उनकी योजना इस बेस को कभी न छोड़ने की थी, क्योंकि यह चीन की परमाणु मिसाइल फैक्ट्री के बेहद करीब है। उनके बयानों ने पश्चिमी सहयोगियों की चिंता बढ़ा दी है, जो पहले से ही अमेरिका-चीन संबंधों में तनाव और उसके आर्थिक व सैन्य असर को लेकर सतर्क हैं।
हालांकि, तालिबान ने ट्रंप के दावों को खारिज कर दिया है। तालिबान प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि “यह एयरफील्ड अफगानिस्तान के नियंत्रण में है, चीन के नहीं।” रिपोर्ट्स के अनुसार, तालिबान अमेरिका से संबंध सामान्य करने की कोशिश कर रहा है, क्योंकि मानवाधिकार हनन और आतंकी खतरे की वजह से वह वैश्विक स्तर पर अलग-थलग पड़ा है।
बगराम एयरबेस का महत्व
अफगानिस्तान की राजधानी काबुल से 44 किलोमीटर दूर स्थित बगराम एयरबेस अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य ठिकाना था। इसमें 11,800 फीट (3,600 मीटर) लंबा रनवे है, जो बड़े कार्गो विमानों और बमवर्षकों को संभालने में सक्षम है। ट्रंप का कहना है कि यह रनवे भारी कंक्रीट और स्टील से बना है और रणनीतिक दृष्टि से बेहद अहम है। ट्रंप ने एक बार फिर पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन पर हमला बोला और कहा कि उनकी जल्दबाज़ी में की गई वापसी ने अमेरिकी हथियारों और सैन्य संपत्तियों को तालिबान के हाथों में छोड़ दिया।
इसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने रूस-यूक्रेन युद्ध पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने उन्हें “निराश” किया है। ट्रंप के अनुसार, उन्हें उम्मीद थी कि व्हाइट हाउस में वापसी के बाद यह युद्ध “कुछ दिनों” में खत्म हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
विशेषज्ञ मानते हैं कि ट्रंप का यह कदम सिर्फ अफगानिस्तान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह चीन और रूस दोनों को रणनीतिक संदेश देने की कोशिश है। अगर अमेरिका वाकई बगराम एयरबेस पर फिर से कब्ज़ा करता है, तो इसका असर हिंद महाद्वीप की सुरक्षा स्थिति, चीन-अमेरिका प्रतिद्वंद्विता और रूस-यूक्रेन युद्ध—तीनों पर गहराई से दिखाई देगा।
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