उन्होंने लक्ष्मण सिंह का 57 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ा, जिन्होंने 1969 में 16 साल और 23 दिन की उम्र में टूर्नामेंट में अपना पहला अर्धशतक लगाया था। भारत के पूर्व लेग-स्पिनर पीयूष चावला इस लिस्ट में तीसरे स्थान पर हैं, जिन्होंने 16 साल और 307 दिन की उम्र में दलीप ट्रॉफी में अर्धशतक लगाया था।
हालांकि, वैभव अपने शतक से सिर्फ 8 रन दूर रह गए। उन्होंने अपनी इस आतिशी पारी के दौरान 7 चौके और सात छक्के लगाए। वैभव ने इस दौरान पहले विकेट के लिए अभिमन्यु ईश्वरन के साथ मिलकर 161 रनों की साझेदारी निभाई।
वैभव हर्ष दुबे की गेंद पर बड़ा शॉट खेलने के प्रयास में बाउंड्री पर अरशद खान को आसान सा कैच दे बैठे। पवेलियन लौटते समय वैभव के चेहरे पर शतक पूरा न कर पाने की निराशा साफतौर पर दिखाई दी।
सेमीफाइनल मैच के पहले दिन वैभव सूर्यवंशी कुछ समय के लिए ईस्ट जोन की कप्तानी संभालते हुए नजर आए थे। दरअसल, मैच के दौरान ईशान किशन के हाथ में चोट लग गई थी, जिसके कारण उन्हें मैदान से बाहर जाना पड़ा था। ईशान की गैरमौजूदगी में वैभव बतौर कार्यवाहक कप्तान जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
कप्तान के तौर पर उनका छोटा सा कार्यकाल निर्णायक साबित हुआ, जब उन्होंने तेज गेंदबाज मुकेश कुमार द्वारा फेंके गए 40वें ओवर में मैदान पर दिए गए ‘नॉट आउट’ फैसले के खिलाफ सफलतापूर्वक रिव्यू लिया।



