“हम लेबनान के साथ पीढ़ियों तक चलने वाला शांति समझौता चाहते हैं”

इजरायल-लेबनान तनाव के बीच नेतन्याहू का बयान:

“हम लेबनान के साथ पीढ़ियों तक चलने वाला शांति समझौता चाहते हैं”

"We want a peace agreement with Lebanon that will last for generations."

मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि उनका देश लेबनान के साथ  ऐसा शांति समझौता चाहता है जो पीढ़ियों तक कायम रहे। यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच संघर्ष जारी है और वॉशिंगटन में संभावित युद्धविराम वार्ता की तैयारी हो रही है।

नेतन्याहू ने शनिवार (11 अप्रैल) को कहा कि इजरायल केवल अस्थायी समाधान नहीं बल्कि दीर्घकालिक शांति चाहता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि क्षेत्र में चल रही सैन्य कार्रवाई अभी समाप्त नहीं हुई है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी बयान में कहा,“हमने उन्हें हरा दिया है, हमें अभी और भी बहुत कुछ करना है।”

इजरायल की ओर से हाल के दिनों में लेबनान पर तेज हमले किए गए हैं, जिनमें हजारों लोगों के हताहत होने की खबरें सामने आई हैं। इन हमलों ने पहले से ही ईरान से जुड़े संघर्ष के बीच क्षेत्रीय हालात को और जटिल बना दिया है।

नेतन्याहू ने ईरान और उसके सहयोगियों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वे अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं।  उन्होंने यह भी दोहराया कि ईरान के खिलाफ इजरायल का अभियान अभी जारी रहेगा और अब तक ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की जा चुकी हैं।

इस बीच, इजरायल और लेबनान के बीच कूटनीतिक स्तर पर बातचीत की पहल भी तेज हुई है। दोनों देशों के अमेरिका स्थित राजदूतों के बीच पहली फोन बातचीत के बाद मंगलवार को वॉशिंगटन में बैठक तय हुई है। इस बैठक में युद्धविराम की घोषणा और औपचारिक वार्ता शुरू करने की तारीख पर चर्चा की जाएगी।

हालांकि, लेबनान के राष्ट्रपति कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की वार्ता तभी संभव होगी जब पहले युद्धविराम लागू किया जाए। दूसरी ओर, इजरायल के राजदूत ने संकेत दिया है कि औपचारिक शांति वार्ता शुरू हो सकती हैं, लेकिन इजरायल हिज़्बुल्लाह के साथ किसी भी युद्धविराम पर चर्चा करने को तैयार नहीं है।

नेतन्याहू ने यह भी बताया कि उन्होंने लेबनान सरकार के बार-बार अनुरोध के बाद प्रत्यक्ष वार्ता को मंजूरी दी है। इजरायली सेना का दावा है कि हालिया हमलों में लेबनान के सशस्त्र समूह हिज़्बुल्लाह के कम से कम 180 लड़ाके मारे गए हैं।

सूत्रों के अनुसार, यदि मंगलवार (14 अप्रैल) को होने वाली बैठक में युद्धविराम की शर्तों पर सहमति बनती है, तो आगे औपचारिक शांति वार्ता का रास्ता खुल सकता है। हालांकि, मौजूदा हालात को देखते हुए दोनों पक्षों के बीच अविश्वास और जमीनी तनाव इस प्रक्रिया को चुनौतीपूर्ण बना रहे हैं।  यह वार्ता न केवल इजरायल-लेबनान संबंधों के लिए बल्कि पूरे मध्य-पूर्व क्षेत्र की स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

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