इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने शनिवार (28 फरवरी) को राष्ट्र के नाम संबोधन में पुष्टि की कि इजरायल ने अमेरिका के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ ‘ऑपरेशन रोअर ऑफ़ द लायन’ शुरू किया है। उन्होंने इस कार्रवाई को खतरे को समाप्त करने का प्रयास बताया और कहा कि ‘ईरान को परमाणु हथियार नहीं मिलने देंगे’।
प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने बताया कि इस अभियान को ‘ऑपरेशन रोअर ऑफ़ द लायन’ नाम दिया गया है और इसका उद्देश्य ईरान के नेतृत्व से उत्पन्न खतरों का मुकाबला करना है। उन्होंने संयुक्त कार्रवाई के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को नेतृत्व करने और समर्थन देने के लिए धन्यवाद दिया।
अपने संबोधन में नेतन्याहू ने ईरान के शासक तंत्र पर दशकों से इजरायल और अमेरिका के खिलाफ शत्रुतापूर्ण रुख अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि तेहरान को परमाणु हथियार हासिल करने की इजाजत नहीं दी जा सकती।
ראש הממשלה בנימין נתניהו:
״אחיי ואחיותיי אזרחי ישראל, לפני שעה קלה יצאנו ישראל וארה״ב למבצע להסרת האיום הקיומי מצד משטר הטרור באיראן.
אני מודה לידידינו הגדול הנשיא דונלד טראמפ על מנהיגותו ההיסטורית. pic.twitter.com/4gx67J2QaE
— ראש ממשלת ישראל (@IsraeliPM_heb) February 28, 2026
नेतन्याहू ने सीधे ईरानी जनता को संबोधित करते हुए फारसी, कुर्द, अज़ेरी, बलूच और अहवाज़ी समुदायों का उल्लेख किया और ईरानी रिजीम को उखाड़ फेंकने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सैन्य कार्रवाई का उद्देश्य केवल खतरों को निष्क्रिय करना ही नहीं, बल्कि ऐसी परिस्थितियां बनाना भी है जिसमें ईरानी नागरिक अपने भविष्य का निर्धारण स्वयं कर सकें।
हमलों के बाद इजरायल ने नागरिक उड़ानों के लिए अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया है और संभावित जवाबी कार्रवाई की आशंका को देखते हुए देश को हाई अलर्ट पर रखा गया है। एहतियातन पूरे देश में एयर रेड सायरन बजाए गए। इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज़ ने कहा कि यह अभियान राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए उत्पन्न तात्कालिक खतरों को दूर करने के उद्देश्य से शुरू किया गया है।
इजरायल के सिविल डिफेंस कानून के तहत देशव्यापी विशेष आपातकाल घोषित किया गया है। अधिकारियों ने नागरिकों से आने वाले दिनों में सुरक्षा निर्देशों का कड़े तरीके से पालन करने की अपील की है। मध्य पूर्व में तेजी से बदलते हालात के बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर अब इस पर है कि यह टकराव किस दिशा में आगे बढ़ता है और क्या कूटनीतिक प्रयासों के जरिए तनाव को नियंत्रित किया जा सकेगा।
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