ग़ुरबत क्या नहीं करवाती: हिंदूओं-सिखों से नफ़रत पालने वाले पाकिस्तान में अजय बंगा का रेड कार्पेट स्वागत

भारत के साथ विश्व कप मैच पर बहिष्कार डालने के बाद भारतीय मूल के विश्व बैंक प्रमुख अजय बंगा की मेहमान नवाजी में जुट गया पाकिस्तान

ग़ुरबत क्या नहीं करवाती: हिंदूओं-सिखों से नफ़रत पालने वाले पाकिस्तान में अजय बंगा का रेड कार्पेट स्वागत

What doesn't poverty make people do: Ajay Banga receives a red carpet welcome in Pakistan, a country that harbors hatred towards Hindus and Sikhs.

पाकिस्तान ने एक ओर भारत के खिलाफ टी20 विश्व कप मैच के बहिष्कार का फैसला किया है, वहीं दूसरी ओर उसने भारतीय मूल के विश्व बैंक प्रमुख अजय बंगा के भव्य स्वागत और मेहमान नवाजी में पाकिस्तान कमर कसकर जुट गया है। भारत के विभाजन के बाद कराची-लाहौर से लेकर इस्लामबाद और खैबर पख्तून ख्वा तक पाकिस्तान में हिंदुओ और सिखों का कत्लेआम किया गया। लाखों सिखो को बेघर किया गया, मंदिर-गुरुद्वारे तोड़े गए, कब्जे गए जिसके निशान आज भी पाकिस्तान की पुरानी गलियों में सबूत बनकर दिखाई देते है। इसी पाकिस्तान में आज भारतीय मूल के सिख व्यक्ति के लिए रेड कार्पेट बिछाई जा रही है। सच है ग़ुरबत क्या नहीं करवाती। पाकिस्तान के विरोधाभासी रुख ने पाकिस्तान के पाखंड का एक और बार पर्दाफाश किया है। इसलिए बंगा के स्वागत को खेल से जुड़े राजनीतिक रुख से अलग रखते हुए आर्थिक मजबूरियों और अंतरराष्ट्रीय निर्भरता के साथ ही चापलूसी की पराकाष्ठा के रूप में देखा जाना चाहिए।

पाकिस्तान गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है और विश्व बैंक व अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) जैसे संस्थानों से ऋण और राहत पैकेज पर उसकी निर्भरता बढ़ी हुई है ऐसे समय अजय बंगा की हालिया पाकिस्तान यात्रा जारी है। इसी पृष्ठभूमि में बंगा के लिए की गई ‘मेहमान नवाजी’ को पाकिस्तान द्वारा अपने एक प्रमुख कर्जदाता को खुश रखने की दयनीय कोशीश है।

दौरान सिंधु जल संधि भी एक अहम कारक के तौर पर सामने आती है। वर्ष 1960 की इस संधि में विश्व बैंक एक सहायक और हस्ताक्षरकर्ता की भूमिका में है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा संधि को निलंबित किए जाने से पाकिस्तान की चिंताएं बढ़ी हैं, क्योंकि उसकी लगभग 80 प्रतिशत कृषि सिंधु नदी प्रणाली पर निर्भर है। कृषि क्षेत्र पाकिस्तान की खाद्य सुरक्षा की रीढ़ है और सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 25 प्रतिशत का योगदान देता है। हालांकि, अजय बंगा पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि सिंधु जल विवाद के समाधान में विश्व बैंक की कोई मध्यस्थ भूमिका नहीं है और वह केवल एक सहायक है।

हालांकि अजय बंगा की चार दिवसीय यात्रा मुख्य रूप से निजी बताई गई, जिसमें वे खुशाब भी गए, जहां उनके माता-पिता विभाजन से पहले रहते थे। हालांकि अजय बंगा का जन्म 1959 में महाराष्ट्र के पुणे में हुआ। उनके पिता हरभजन सिंह बंगा 1947 में भारत आए और बाद में भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में सेवा की। बावजूद इसके पाकिस्तान में उनके स्वागत में असाधारण औपचारिकता देखने को मिल रही है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दिखा कि बंगा का स्वागत घुड़सवार दस्ते और मार्चिंग बैंड के साथ किया जा रहा है, जिसमें बॉलीवुड गीत “मेरा पिया घर आया” बजाया गया। रास्तों के दोनों ओर छात्रों की कतारें लगाई गईं और बड़े-बड़े बैनरों पर पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज शरीफ के साथ बंगा की तस्वीरें लगाई गईं।

यात्रा के अंतिम दिन अजय बंगा ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगजेब से मुलाकात की। इन बैठकों में अगले दस वर्षों में विश्व बैंक से 20 अरब डॉलर (करीब 1.8 लाख करोड़ रुपये) की वित्तीय सहायता पर चर्चा हुई। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, पाकिस्तान पर कुल बाहरी कर्ज लगभग 135 अरब डॉलर (करीब 11 लाख करोड़ रुपये) है, जिसमें करीब पांचवां हिस्सा विश्व बैंक का है।

इसी बीच प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का एक बयान भी चर्चा में रहा, जिसमें उन्होंने कहा, “जब फील्ड मार्शल असीम मुनीर और मैं दुनिया भर में पैसा मांगने जाते हैं, तो हमें शर्म महसूस होती है। कर्ज लेना हमारे आत्मसम्मान पर बड़ा बोझ है। हमारे सिर शर्म से झुक जाते हैं।”

इस पूरे प्रकरण पर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं भी देखने को मिलीं। एक यूजर ने ट्वीट किया “एक बार फिर पाकिस्तान भारतीय मूल के व्यक्ति से भीख मांगने के लिए झुक गया। यह 16 दिसंबर 1971 जैसी ही भावनाएं देता है।”

जहां अजय बंगा की यात्रा उनके पारिवारिक मूल से जुड़ने का एक निजी प्रयास मानी जा रही है, वहीं पाकिस्तानी सरकार द्वारा दिया गया भव्य प्रोटोकॉल पाकिस्तान पैसे के लिए चापलूसी की किसी भी सिमा को पार कर सकता है यह दिखता है।

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