सामाजिक और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के भूख हड़ताल का आज शुक्रवार को 20वां दिन है. उनका वजन तेजी से गिर रहा है, अब तक 9 किलोग्राम वजन कम हो गया है. उनकी तबीयत अब गंभीर होती जा रही है. लंबे समय से भूख हड़ताल करने की वजह से उनके अंगों पर असर पड़ने लगा है. लेकिन वांगचुक अपनी हड़ताल खत्म करने को राजी नहीं हैं. कोर्ट ने भी जान बचाने की हिदायत दे दी है तो सरकार के पास अब क्या विकल्प बचता है जिससे वांगचुक को जिंदा रखा जा सके. क्या सरकार मानवाधिकार कार्यकर्ता इरोम शर्मिला वाला तरीका अपना सकती है, जिसकी वजह से उन्होंने लगातार 16 साल भूख हड़ताल किया था.
देश में सबसे लंबी भूख हड़ताल
भारत में सबसे लंबी भूख हड़ताल मणिपुर की मानवाधिकार कार्यकर्ता इरोम चानू शर्मिला ने की थी. उन्हें आयरन लेडी ऑफ मणिपुर के नाम से भी जाना जाता है. उन्होंने सशस्त्र बल अधिनियम (AFSPA) को हटाने की मांग को लेकर करीब 16 साल तक लगातार भूख हड़ताल की, उनका आंदोलन पूरी तरह अहिंसक था और उन्होंने अपने शांतिपूर्ण विरोध से देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया का ध्यान इस मुद्दे की ओर खींचा. इसी लंबे संघर्ष और संकल्प की वजह से इरोम शर्मिला मानवाधिकार आंदोलन की एक प्रमुख पहचान बन गईं.
क्यों शुरू की थी भूख हड़ताल?
2 नवंबर 2000 को मणिपुर के मालोम इलाके में एक घटना हुई, जिसे मालोम नरसंहार के नाम से जाना जाता है. आरोप था कि असम राइफल्स के जवानों की कार्रवाई में 10 आम नागरिकों की मौत हो गई थी. इस घटना से आहत होकर इरोम शर्मिला ने AFSPA को हटाने की मांग करते हुए भूख हड़ताल शुरू कर दी. उनका मानना था कि यह कानून संघर्ष वाले इलाकों में सुरक्षा बलों को बहुत ज्यादा अधिकार देता है, जिससे मानवाधिकारों के उल्लंघन की आशंका बढ़ जाती है. वहीं इस कानून के समर्थकों का कहना है कि अशांत क्षेत्रों में सुरक्षा बनाए रखने के लिए यह जरूरी है.
इरोम शर्मिला ने 5 नवंबर 2000 को अपना अनशन शुरू किया और 9 अगस्त 2016 तक इसे जारी रखा. करीब 16 साल या लगभग 5,793 दिनों तक उन्होंने अपनी भूख हड़ताल जारी रखी. इसी वजह से उनकी भूख हड़ताल को दुनिया की सबसे लंबी राजनीतिक भूख हड़ताल माना जाता है.
हथियारबंद गार्ड, और डॉक्टरों-नर्सों की टीम
इस दौरान उनके आस-पास हथियारबंद गार्ड और डॉक्टरों-नर्सों की एक टीम तैनात रहती थी, जो उन्हें जबरन नाक में पाइप डालकर लिक्विड न्यूट्रिएंट्स और दवाइयां दिया करती थी. यह प्रक्रिया कभी-कभी दिन में तीन बार तक की जाती थी. ऐसा अगले 16 सालों तक चलता रहा. वह नाक और पेट के बीच लगी 3 फीट लंबी ट्यूब के जरिए पोषक तत्वों और पानी का मिश्रण पंप करके जिंदा रखा गया.
क्या खाकर तोड़ा था अपना अनशन
नली के जरिए तरल पदार्थ दिए जाने के कारण उनकी नाक में हमेशा नली लगी ही रहती थी और यही आगे चलकर उनकी खास पहचान बन गई. इरोम शर्मिला ने नवंबर 2000 में भूख हड़ताल शुरू किया था और 16 साल बाद उन्होंने अगस्त 2016 में राज्य में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले हड़ताल खत्म कर दिया. दुनिया का सबसे लंबा भूख हड़ताल का रिकॉर्ड बनाने वाली शर्मिला ने हथेली पर रखे शहद को अपनी अंगुली से चखकर यह अनशन तोड़ा था. 16 साल में उन्होंने पहली बार खुद से कुछ खाया था. इससे पहले उन्होंने आखिरी बार 4 नवंबर 2000 को अपनी मर्जी से खाना खाया था.
