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Friday, July 17, 2026
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भगवान कृष्ण लालो के पास क्यों आए? मेकर्स ने किया खुलासा!

शो में जब शेखर सुमन ने पूछा कि आखिर फिल्म की कहानी में भगवान कृष्ण सिर्फ लालो के पास ही क्यों आते हैं, जबकि बाकी किरदार भी अपनी-अपनी परेशानियों से गुजर रहे हैं।

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अभिनेता श्रुहद गोस्वामी, निर्देशक अंकित साखिया और निर्माता जय व्यास ने शेखर सुमन के चैट शो ‘शेखर टुनाइट’ में अपनी फिल्म ‘लालो- कृष्ण सदा सहायते’ की शानदार सफलता, फिल्म बनाने के अनुभव और उससे जुड़े आध्यात्मिक संदेश को लेकर खुलकर बातचीत की।

शो में जब शेखर सुमन ने पूछा कि आखिर फिल्म की कहानी में भगवान कृष्ण सिर्फ लालो के पास ही क्यों आते हैं, जबकि बाकी किरदार भी अपनी-अपनी परेशानियों से गुजर रहे हैं।

इस सवाल का जवाब देते हुए निर्देशक अंकित साखिया ने कहा, ”लालो के किरदार में सबसे बड़ी बात उसकी मासूमियत थी। वह गलत संगत में चला गया था और कुछ गलत फैसलों में फंस गया था। लेकिन उसकी पत्नी तुलसी को पूरा विश्वास था कि उसका लालो एक दिन जरूर वापस आएगा।”

उन्होंने आगे कहानी के बारे में बताते हुए कहा, ”लालो एक फार्म हाउस में चोरी करने जाता है, जहां वह मुश्किल हालात में फंस जाता है। ऐसे समय में भगवान कृष्ण उसकी मदद करने आते हैं। हालांकि, कृष्ण उसे वहां से निकालने के बजाय उसे सही रास्ता दिखाते हैं और समझाते हैं कि उसे अपनी लड़ाई खुद लड़नी होगी।”

निर्देशक ने कहा, ”भगवान कृष्ण लालो के पास इसलिए आते हैं क्योंकि उसकी पत्नी तुलसी की श्रद्धा और विश्वास बहुत मजबूत था। उसे भरोसा था कि उसका पति वापस सही रास्ते पर आएगा। कृष्ण भगवान लालो को सिर्फ बचाते नहीं हैं, बल्कि उसे समझाते हैं कि उसे खुद अपनी जिंदगी बदलनी होगी। इसके बाद लालो खुद उस मुश्किल परिस्थिति से बाहर निकलता है। उसकी सोच साफ थी और उसके अंदर अच्छाई थी, इसलिए भगवान कृष्ण उसके पास आए।”

वहीं, अभिनेता श्रुहद गोस्वामी ने फिल्म की सफलता के बाद मिले एक अनुभव को याद किया और बताया कि जब फिल्म ने 100 करोड़ रुपए की कमाई का आंकड़ा पार किया, तब भी पूरी टीम दर्शकों का धन्यवाद करने के लिए उनसे मिल रही थी।

श्रुहद ने कहा, ”फिल्म ने 100 करोड़ रुपए का आंकड़ा पार कर लिया था। इसके बाद भी हम लोगों से मिलकर उनका धन्यवाद कर रहे थे। इस दौरान एक इंसान से मुलाकात हुई, जिसकी एक बात मेरे दिल में बस गई।

उन्होंने कहा कि कृष्ण हमें कब दर्शन देते हैं, यह सिर्फ मंदिर जाने या उन्हें भोग लगाने से तय नहीं होता। कृष्ण तब दर्शन देते हैं, जब आप उन्हें अपने कर्म का भोग लगाते हैं। जब आप पूरी ईमानदारी और सच्ची निष्ठा से अपना काम करते रहते हैं, तब भगवान आपके साथ होते हैं।”
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