अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार (10 अप्रैल) को कहा कि अमेरिका जल्द ही होर्मुज जलडमरूमध्य को काफी जल्दी खोल देगा, चाहे इसमें ईरान का सहयोग करें या ना करें। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि यह कदम आसान नहीं होगा।
मैरीलैंड स्थित जॉइंट बेस एंड्रूज़ पर एयर फोर्स वन में सवार होने से पहले पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा, “यह आसान नहीं होगा। मैं बस इतना कहना चाहूंगा कि हम इसे जल्द ही खोल देंगे।” उन्होंने संकेत दिया कि इस प्रयास में अन्य देश भी अमेरिका का साथ दे सकते हैं, लेकिन किसी का नाम स्पष्ट नहीं किया। ट्रंप ने कहा, “अन्य देश भी इस जलडमरूमध्य का उपयोग करते हैं। इसलिए अन्य देश भी आगे आ रहे हैं, और वे मदद करेंगे।”
ट्रंप ने कहा है की अमेरिका ईरान को इस अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों से किसी प्रकार का टोल वसूलने की अनुमति नहीं देगा। उनका यह बयान उस रिपोर्ट के बाद आया, जिसमें दावा किया गया था कि तेहरान होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल टैंकरों पर प्रति बैरल 1 डॉलर का शुल्क लगाने की योजना बना रहा है। हालांकि, इस जलडमरूमध्य के नियंत्रण में ईरान के साथ साझेदार ओमान ने ऐसी किसी भी योजना से इनकार किया है।
ईरान युद्ध शुरू होने के बाद तेहरान द्वारा इस जलडमरूमध्य को अवरुद्ध किए जाने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर अब तक का सबसे बड़ा असर पड़ा है। यह मार्ग दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल और एलएनजी आपूर्ति के लिए अहम ‘चोकपॉइंट’ माना जाता है।
इस बीच, NATO सहयोगियों की निष्क्रियता को लेकर ट्रंप ने नाराजगी जताई है। ट्रंप से मुलाकात के बाद नाटो महासचिव मार्क रट ने यूरोपीय देशों से कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति आने वाले दिनों में जलडमरूमध्य की सुरक्षा के लिए ठोस प्रतिबद्धता चाहते हैं।
उल्लेखनीय है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर हमले किए थे, जिसके जवाब में ईरान ने इज़राइल और खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की। इस युद्ध में हजारों लोगों की मौत हो चुकी है और लाखों लोग विस्थापित हुए हैं।
हालिया तनाव के बीच अमेरिका ने मंगलवार को ईरान के साथ दो सप्ताह के संघर्षविराम की घोषणा की थी। हालांकि, क्षेत्र में जारी सैन्य गतिविधियां और लेबनान में इज़राइली हमले इस नाजुक संघर्षविराम को पटरी से उतारने का खतरा पैदा कर रहे हैं। वहीं, होर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही अभी भी बाधित बनी हुई है, जिससे वैश्विक बाजारों में अस्थिरता और तेल की कीमतों में उछाल देखा जा रहा है।
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