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Sunday, January 25, 2026
होमलाइफ़स्टाइलनींद और सेहत का सुपरस्टार हार्मोन ‘मेलाटोनिन’: रिसर्च ने बताई अहमियत!

नींद और सेहत का सुपरस्टार हार्मोन ‘मेलाटोनिन’: रिसर्च ने बताई अहमियत!

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नींद को नियंत्रित करने वाला प्राकृतिक हार्मोन मेलाटोनिन हाल के वर्षों में वैज्ञानिक शोध का बड़ा विषय बन गया है। इसे मस्तिष्क की पीनियल ग्रंथि अंधेरे में उत्पन्न करती है और यही कारण है कि इसे अक्सर “स्लीप हार्मोन” कहा जाता है। यह हमारे सर्केडियन रिदम यानी नींद-जागने की लय को संतुलित रखने में अहम भूमिका निभाता है।

अमेरिका की नेशनल स्लीप फाउंडेशन के एक अध्ययन के मुताबिक, 0.5 से 3 मिलीग्राम तक की कम खुराक लेने से उन लोगों की नींद में सुधार देखा गया, जिन्हें सोने में कठिनाई होती है या जो जेट लैग से परेशान रहते हैं। लंबी हवाई यात्राओं या नाइट शिफ्ट में काम करने वालों के लिए भी मेलाटोनिन सप्लीमेंट फायदेमंद साबित हुए हैं।

मेलाटोनिन एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट भी है। यह शरीर में फ्री रेडिकल्स को खत्म करता है, जो कैंसर, हृदय रोग और उम्र बढ़ने से जुड़ी बीमारियों का कारण माने जाते हैं। 2020 के शोध बताते हैं कि यह अल्जाइमर और पार्किंसन जैसे न्यूरोलॉजिकल रोगों से जूझने में भी सहायक हो सकता है। कोविड-19 महामारी के दौरान कुछ प्रारंभिक अध्ययनों में पाया गया कि मेलाटोनिन इंफ्लेमेशन कम करने और इम्यून सिस्टम को मॉड्यूलेट करने में भूमिका निभा सकता है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि अल्पकालिक उपयोग में मेलाटोनिन आमतौर पर सुरक्षित है। लेकिन इसके कुछ दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं, जैसे सिरदर्द, चक्कर, दिन में नींद आना और मूड में बदलाव। गर्भवती महिलाएं, स्तनपान कराने वाली माताएं और दवाइयां लेने वाले मरीज इसे इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

अगर आप मेलाटोनिन सप्लीमेंट्स पर निर्भर नहीं रहना चाहते तो कुछ आसान आदतें अपनाकर इसके स्तर को प्राकृतिक रूप से बढ़ाया जा सकता है। इसके लिए रात को कमरे में रोशनी कम रखें और मोबाइल-लैपटॉप जैसी स्क्रीन की नीली रोशनी से दूरी बनाएँ। दिन के समय सूरज की रोशनी में समय बिताना भी ज़रूरी है, ताकि शरीर की बॉडी क्लॉक संतुलित रह सके। इसके अलावा, सोने से पहले भारी भोजन और कैफीन का सेवन न करें और रोज़ाना एक निश्चित समय पर सोने की आदत डालें। ये उपाय न सिर्फ नींद को बेहतर बनाएंगे बल्कि समग्र स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी होंगे।

वैज्ञानिकों का मानना है कि मेलाटोनिन सिर्फ एक हार्मोन नहीं, बल्कि शरीर की जैविक घड़ी का अहम हिस्सा है। यह न सिर्फ नींद को बेहतर करता है बल्कि संपूर्ण स्वास्थ्य और दीर्घायु में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है।

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