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ब्रेस्टफीड वीक: मां के दूध की मात्रा बढ़ाने के लिए अपनाएं ये प्राकृतिक उपाय!

नई माताओं के लिए खास टिप्स

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हर साल अगस्त के पहले सप्ताह को ‘विश्व स्तनपान सप्ताह’ के रूप में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य समाज और खासतौर पर नई माताओं को स्तनपान के महत्व के प्रति जागरूक करना है। नवजात शिशु के लिए जीवन के पहले छह महीने तक केवल मां का दूध ही संपूर्ण पोषण का स्रोत होता है। यह न केवल बच्चे को बीमारियों से बचाता है, बल्कि शारीरिक और मानसिक विकास में भी सहायक होता है। हालांकि, आज के भागदौड़ भरे जीवन में खासकर कामकाजी महिलाओं के लिए स्तनपान को बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है। इसके अलावा, जानकारी के अभाव में महिलाएं यह नहीं समझ पातीं कि उनका आहार भी दूध उत्पादन में अहम भूमिका निभाता है।

आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों में कुछ प्राकृतिक चीजों को स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए लाभकारी माना गया है। इनमें सबसे प्रमुख है मेथी के दाने। भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) के अनुसार, मेथी में मौजूद फाइटोएस्ट्रोजन हार्मोन संतुलन में मदद करता है जिससे ब्रेस्ट मिल्क का उत्पादन बढ़ता है। इसे रातभर भिगोकर सुबह गुनगुने पानी के साथ पीना फायदेमंद होता है, या चाय में मिलाकर भी लिया जा सकता है।

ड्राई फ्रूट्स जैसे बादाम, अखरोट, काजू और पिस्ता, शरीर को ऊर्जा देते हैं और इनमें मौजूद हेल्दी फैट्स हार्मोनल संतुलन बनाए रखते हैं जिससे दूध का उत्पादन बेहतर होता है। इन्हें स्नैक्स के रूप में दिन में एक या दो बार लिया जा सकता है। हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक, मेथी, सरसों का साग, लौकी और तोरी कैल्शियम, फाइबर, आयरन और अन्य पोषक तत्वों से भरपूर होती हैं। विशेष रूप से लौकी और दालों का सेवन दूध की गुणवत्ता और मात्रा दोनों को बढ़ाने में मदद करता है।

सौंफ के बीज, जिनका उपयोग पारंपरिक भारतीय घरों में आम है, पाचन सुधारने और हार्मोन बैलेंस बनाए रखने में मददगार हैं। सौंफ का पानी या सौंफ की चाय स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए बहुत उपयोगी साबित होता है।

जीरा भी एक कारगर उपाय है। यह न केवल प्रसव के बाद की थकान को दूर करता है, बल्कि दूध उत्पादन को भी बढ़ाता है। जीरे का पानी दिन में दो बार लेना लाभकारी माना जाता है। आयुर्वेदिक औषधि शतावरी महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य को बेहतर बनाती है और दूध बनने की प्रक्रिया को तेज करती है। इसे पाउडर या टैबलेट के रूप में, विशेषज्ञ की सलाह से लिया जा सकता है।

तिल, जो कैल्शियम का अच्छा स्रोत है, हार्मोनल संतुलन बनाए रखने में सहायक है। तिल से बने लड्डू या सब्जियों में इसका तड़का डालकर सेवन करना लाभदायक होता है। अंत में, अलसी के बीज जो ओमेगा-3 फैटी एसिड से भरपूर होते हैं, मां के स्वास्थ्य और दूध उत्पादन दोनों में वृद्धि करते हैं। इन्हें भूनकर माउथ फ्रेशनर की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।

स्तनपान केवल बच्चे के लिए ही नहीं, मां के लिए भी स्वास्थ्यवर्धक होता है। इसलिए जरूरी है कि माताएं सही आहार लेकर अपने शरीर को पर्याप्त पोषण दें ताकि वे इस जिम्मेदारी को सफलतापूर्वक निभा सकें।

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