कर्नाटक में मिला 3,500 से 5,000 वर्ष पुराना नवपाषाण युग का दूसरा मानव कंकाल

कर्नाटक में मिला 3,500 से 5,000 वर्ष पुराना नवपाषाण युग का दूसरा मानव कंकाल

A second human skeleton dating back 3,500 to 5,000 years to the Neolithic period has been discovered in Karnataka.

कर्नाटक के टेक्कलाकोटे स्थित गौद्रूमूले बेट्टा पहाड़ी पर चल रही खुदाई के दौरान पुरातत्वविदों को नवपाषाण  काल से जुड़ा दूसरा मानव कंकाल मिला है। इस कंकाल की आयु करीब 3,500 से 5,000 वर्ष के बीच आंकी जा रही है। इससे पहले इसी स्थल पर कुछ दिन पहले एक मानव कंकाल की खोज की गई थी, जिसके बाद खुदाई को और गहराई से आगे बढ़ाया गया। पुरातत्वविदों के अनुसार, शनिवार (7 फरवरी) को खुदाई के दौरान दूसरा कंकाल सामने आया, जो बेहद अच्छी स्थिति में है। इस खोज से टेक्कलाकोटे क्षेत्र के प्रागैतिहासिक काल में मानव जीवन और दफन प्रथाओं को समझने में अहम मदद मिलने की उम्मीद है।

खुदाई का नेतृत्व कर रहीं न्यूयॉर्क स्थित हार्टविक कॉलेज की प्रोफेसर नमिता एस. सुगंधी ने बताया, “स्थल पर मिले दूसरे मानव कंकाल की छाती पर एक भारी पत्थर रखा हुआ मिला है। चूंकि इस पत्थर को हटाने से पहले मिले मानव कंकाल को नुकसान पहुंच सकता है, इसलिए हमने उसे यथास्थान छोड़ दिया है।” उन्होंने आगे कहा, “इस क्षेत्र का इतिहास लगभग 3,500 से 5,000 वर्ष पुराना है, जो शोध के लिए अत्यंत उपयुक्त है। जक्केरु गुड्डा के पास बूदी डिब्बा में एक प्रमुख लौह युग स्थल भी है। गहन अध्ययन से प्रागैतिहासिक काल को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी। प्रशासन को इन स्थलों के संरक्षण और सुरक्षा के लिए कदम उठाने चाहिए।”

खुदाई दल को गौद्रूमूले बेट्टा पहाड़ी पर नवपाषाण काल में उपयोग किए जाने वाले कुछ हथियार भी मिले हैं। प्रोफेसर सुगंधी के अनुसार, “इन हथियारों का उपयोग संभवतः शिकार करने या खाल उतारने के लिए किया जाता रहा होगा। यहां मिले पत्थरों के बड़े ढेर मानव बस्ती की संभावना को मजबूत करते हैं।”

प्रख्यात पुरातत्वविद प्रो. रवि कोरिशेट्टर ने डेक्कन हेराल्ड से बातचीत में कहा, “टेक्कलाकोटे का यह खुदाई स्थल लगभग 4,000 वर्ष पूर्व के नवपाषाण काल के मानव जीवन पर प्रकाश डालता है। इन खोजों से संकेत मिलता है कि उस समय के लोग मुख्य रूप से कृषि आधारित समुदाय थे। उनकी दफन प्रथाएं विशिष्ट थीं, जहां बुजुर्गों और प्रतिष्ठित व्यक्तियों को घरों के गड्ढों में बड़े घड़ों के साथ विशेष रूप से दफनाया जाता था। उन्होंने यह भी बताया कि 1964-65 में एम. एस. नागराज राव द्वारा की गई खुदाई में मिले मानव कंकाल, मृद्भांड और अन्य औजार वर्तमान में पुणे के डेक्कन कॉलेज संग्रहालय में प्रदर्शित हैं।

शनिवार (7 फरवरी)को हम्पी–कमलापुर पुरातात्विक संग्रहालय एवं विरासत विभाग के उप निदेशक और खुदाई दल के निदेशक आर. शेजेश्वर ने स्थल का दौरा कर खोजे गए कंकालों का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा, “यह कंकाल नवपाषाण काल के बताए जा रहे हैं। हालांकि इनकी आयु 3,000 से 5,000 वर्ष के बीच आंकी जा रही है, लेकिन सटीक काल निर्धारण कार्बन डेटिंग परीक्षण के बाद ही किया जा सकेगा।” इन खोजों से कर्नाटक के इस क्षेत्र में प्रागैतिहासिक मानव सभ्यता की गहरी और संगठित मौजूदगी की पुष्टि होती है, जिससे दक्षिण भारत के नवपाषाण कालीन इतिहास को समझने के नए रास्ते खुल सकते हैं।

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