भारत के स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर विमान एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) कार्यक्रम में एक अहम प्रगति दर्ज की गई है। एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) ने AMCA के रियर फ्यूज़लाज (पिछले धड़) के विस्तृत डिज़ाइन और इंजीनियरिंग के लिए औपचारिक रूप से स्टेटमेंट ऑफ वर्क (SoW) जारी कर दिया है। इसे AMCA परियोजना के लिए एक निर्णायक तकनीकी मील का पत्थर माना जा रहा है।
रियर फ्यूज़लाज AMCA का एक अत्यंत संवेदनशील और जटिल संरचनात्मक हिस्सा है, क्योंकि इसमें इंजन बे, एग्जॉस्ट सिस्टम, थर्मल मैनेजमेंट ज़ोन और स्टील्थ से जुड़े कई अहम तत्व एक साथ एकीकृत होते हैं। SoW में स्पष्ट किया गया है कि चुनी गई एजेंसी को मॉडल-बेस्ड डिज़ाइन से लेकर मैन्युफैक्चरिंग-रेडी ड्रॉइंग तक की पूरी जिम्मेदारी निभानी होगी।
SoW के दायरे में रियर फ्यूज़लाज की स्ट्रक्चरल लेआउट को अंतिम रूप देना शामिल है, ताकि इंजन, एग्जॉस्ट और थर्मल सिस्टम्स के बीच निर्बाध इंटरफेस सुनिश्चित किया जा सके। इस चरण में स्ट्रेस और फटीग एनालिसिस को केंद्रीय महत्व दिया गया है, क्योंकि पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान को अत्यधिक ऑपरेशनल लोड, तेज़ गति और आक्रामक युद्धाभ्यास सहने होते हैं।
जॉइंट और फास्टनर डिज़ाइन को इस तरह तैयार करना होगा कि लोड का वितरण बेहतर हो, लेकिन साथ ही रडार क्रॉस सेक्शन (RCS) भी न्यूनतम बना रहे। टॉलरेंस स्टैक-अप स्टडीज़ को अनिवार्य किया गया है, जिससे निर्माण के दौरान होने वाले सूक्ष्म अंतर AMCA के जटिल ज्योमेट्री पर असर न डालें।
रियर फ्यूज़लाज के भीतर मौजूद इंटरनल लोड पाथ्स एयरफ्रेम से इंजन तक बल का संचार करते हैं, जिसके लिए हल्के लेकिन अत्यंत मजबूत कंपोज़िट मटीरियल और एडवांस्ड एलॉय का इस्तेमाल किया जाएगा। स्टील्थ के लिहाज़ से विशेष कंटूर और शेपिंग जरूरी है, ताकि रडार तरंगें परावर्तित न हों, साथ ही एयरोडायनामिक दक्षता भी बनी रहे।
वजन नियंत्रण को इस चरण में सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है, क्योंकि रियर फ्यूज़लाज में अतिरिक्त भार AMCA की सुपर-मैन्युवरेबिलिटी और थ्रस्ट-टू-वेट रेशियो को प्रभावित कर सकता है। बार-बार आफ्टरबर्नर उपयोग, उच्च तापमान और बर्ड स्ट्राइक जैसी स्थितियों में टिकाऊपन सुनिश्चित करने के लिए कठोर परीक्षण मानकों को शामिल किया गया है।
मेंटेनेबिलिटी को ध्यान में रखते हुए मॉड्यूलर एक्सेस पैनल जैसी सुविधाओं का प्रावधान भी डिज़ाइन का हिस्सा होगा, जिससे सीमित संसाधनों वाले अग्रिम ठिकानों पर भी तेज़ मरम्मत संभव हो सके।
AMCA कार्यक्रम अब कॉन्फ़िगरेशन परिभाषा के चरण से आगे बढ़कर गहन इंजीनियरिंग चरण में प्रवेश कर चुका है, जो भारत की स्वदेशी पांचवीं पीढ़ी की क्षमताओं की दिशा में मजबूत संकेत है। रियर फ्यूज़लाज के डिज़ाइन में तेजस Mk-2 और वैश्विक स्टील्थ प्लेटफॉर्म जैसे F-35 से मिले अनुभवों का उपयोग किया जाएगा, लेकिन इन्हें भारतीय औद्योगिक और विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र के अनुरूप ढाला जाएगा।
इस टेंडर के जरिए निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा दिया जा रहा है, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के अनुरूप है। बोलीदाताओं को NASTRAN या ANSYS जैसे फिनाइट एलिमेंट एनालिसिस टूल्स और CATIA V5/V6 में विशेषज्ञता दिखानी होगी। साथ ही, 1,500 डिग्री सेल्सियस तक के एग्जॉस्ट तापमान को ध्यान में रखते हुए थर्मल-स्ट्रक्चरल सिमुलेशन भी आवश्यक होगा।
यह SoW 2024 में कैबिनेट से मिली मंज़ूरी के बाद तेज़ हुई समय-सीमा को दर्शाता है। लक्ष्य है कि 2028–29 तक AMCA का पहला प्रोटोटाइप तैयार हो जाए। HAL और निजी कंपनियां जैसे टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स इसके उत्पादन में अहम भूमिका निभा सकती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, रियर फ्यूज़लाज की सफल डिज़ाइन और एकीकरण भारत की स्टील्थ एयरफ्रेम तकनीक में आत्मनिर्भरता का निर्णायक परीक्षण होगा। इसके साथ ही, यह Indo-Pacific क्षेत्र में भारत की रणनीतिक प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करेगा और भविष्य में मित्र देशों को निर्यात की संभावनाएं भी खोल सकता है। इस अहम पड़ाव के साथ, AMCA कार्यक्रम लो-रेट इनिशियल प्रोडक्शन की ओर एक और कदम बढ़ा चुका है, और रियर फ्यूज़लाज भारत की एयरोस्पेस इंजीनियरिंग क्षमता की असली कसौटी साबित होने जा रहा है।
यह भी पढ़ें:
संभल में फिर चला प्रशासन का बुलडोजर, दो अवैध मस्जिद और एक मदरसा ध्वस्त
दिल्ली शब्दोत्सव 2026 में यूसीसी जरूरी, ठोस पहल की मांग
पाकिस्तान का निवेश संकट गहराया, बड़े वादों के बावजूद निवेश लाने में नाकाम रहा SIFC
