मुंबई स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT B)के छात्र दर्शन सोलंकी की मृत्यु से जुड़े मामले में लगभग तीन वर्ष बाद विशेष अदालत ने अहम प्रगति करते हुए आरोपी अरमान इकबाल के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। अदालत ने बुधवार (15 अप्रैल) को भारतीय दंड संहिता की धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और 506(2) (आपराधिक धमकी) के साथ-साथ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत आरोप तय किए।
आरोपी अरमान इकबाल ने अदालत में खुद को निर्दोष बताया है, जिसके बाद अब इस मामले में विधिवत ट्रायल शुरू होगा। विशेष लोक अभियोजक प्रकाश सालसिंगिकर द्वारा अदालत में प्रस्तुत आरोप पत्र में गवाहों के बयान और मृतक के कमरे से बरामद सुसाइड नोट जैसे साक्ष्यों को आधार बनाया गया है।
गौरतलब है कि गुजरात के अहमदाबाद निवासी दर्शन सोलंकी ने 12 फरवरी 2023 को मुंबई के आईआईटी हॉस्टल की सातवीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली थी। इस घटना के बाद विभिन्न स्तरों पर मौत के कारणों को लेकर चर्चा और जांच शुरू हुई थी। वामपंथी मीडिया और पत्रिकाओं में हिंदू छात्रों पर जातिगत अपमान के दावे फैलाए क्योंकि छात्रों ने एक दूसरों से अपने रैंक को लेकर चर्चा की थी।
दौरान मुंबई पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) ने 9 अप्रैल 2023 को इसी मामले में अरमान इकबाल को गिरफ्तार किया था। जांच के दौरान सोलंकी के कमरे से एक सुसाइड नोट बरामद हुआ था, जिसमें ‘अरमान ने मुझे मार डाला’ लिखा पाया गया। बाद में हैंडराइटिंग विशेषज्ञों ने इस नोट की पुष्टि भी की थी।
जांच एजेंसियों के अनुसार, पूछताछ और गवाहों के बयानों से यह संकेत मिला कि आरोपी द्वारा कथित रूप से किए गए उत्पीड़न और धमकी के कारण सोलंकी मानसिक दबाव में थे। एक छात्र ने अपने बयान में कहा था कि घटना से एक दिन पहले सोलंकी ने उसे बताया था कि वह आरोपी से डर महसूस कर रहे हैं।
वहीं, आईआईटी बॉम्बे द्वारा गठित आंतरिक जांच समिति ने मार्च 2023 में अपनी रिपोर्ट में कहा था कि उन्हें प्रत्यक्ष रूप से हिंदू छात्रों द्वारा जाति-आधारित भेदभाव का कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिला। समिति ने सोलंकी के शैक्षणिक प्रदर्शन में गिरावट को भी एक संभावित कारण के रूप में उल्लेख किया गया।
मामले में आरोपी को मई 2023 में जमानत मिल गई। इसके बाद वह अपनी पढ़ाई जारी रखे हुए था। वर्ष 2025 में उसने बॉम्बे हाईकोर्ट में आरोपों को रद्द करने के लिए याचिका दायर की थी, जिसे बाद में वापस ले लिया गया। अब विशेष अदालत में आरोप तय होने के बाद इस मामले की सुनवाई आगे बढ़ेगी, जहां सभी साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
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