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नोएडा में श्रमिक प्रदर्शनों दरम्यान हिंसा में पाकिस्तान से संचालित सोशल मीडिया अकाउंट्स की भूमिका

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उत्तर प्रदेश के नोएडा में हाल ही में हुई हिंसा को लेकर पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। अधिकारियों के अनुसार, यह घटना एक “पूर्व नियोजित और बहुस्तरीय साजिश” का हिस्सा थी, जिसमें पाकिस्तान से संचालित दो सोशल मीडिया अकाउंट्स ने भ्रामक सूचनाएं फैलाकर स्थिति को भड़काने में अहम भूमिका निभाई।

गुरुवार (16 अप्रैल)को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह ने बताया कि फैक्ट्री श्रमिकों का आंदोलन मूल रूप से वेतन वृद्धि की मांग को लेकर शुरू हुआ था, लेकिन बाद में बाहरी तत्वों ने इसे हिंसक रूप दिया। उन्होंने कहा कि फिलहाल स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और पिछले दो दिनों से नोएडा में शांति बनी हुई है। लक्ष्मी सिंह ने कहा, “पिछले दो दिन से नोएडा में शांति है, पुलिस ने फ्लैग मार्च किया, पिकेट ड्यूटी की, सभी बिजनेस यूनिट खुल गईं, लेबर अलग-अलग शिफ्ट में काम करने लगे… UP सरकार ने हाई-लेवल कमेटी की सिफारिशें मान ली थीं, सैलरी बढ़ा दी गई थी, लेबर खुश थे… लेबर की हालत देखकर श्रमिक बोर्ड बनाने का फैसला लिया गया है, इसकी जानकारी श्रमिकों को दी गई, फिर वे काम पर लौट आए। 13 अप्रैल को कुछ लोगों ने हिंसा करने की कोशिश की थी, पुलिस ने कंट्रोल किया, उसके बाद दो सोशल मीडिया हैंडल से झूठी खबर बनाने की कोशिश की गई, इसे वायरल किया गया, हमने इसे वेरिफाई किया, वे पुलिस फायरिंग में मौत का दावा कर रहे थे, दो मामलें दर्ज किए गए हैं… जाँच के बाद पता चला कि दो X हैंडल पाकिस्तान से ऑपरेट हो रहे हैं, VPN का गलत इस्तेमाल हो रहा है, आगे की जानकारी दी जाएगी। मैं लोगों से अपील करता हूं कि ऐसी गलत खबरों पर विश्वास न करें, और हमारा साथ दें।”

सरकार ने उच्च स्तरीय समिति की सिफारिशों को स्वीकार करते हुए न्यूनतम वेतन में वृद्धि और वेज बोर्ड के गठन की घोषणा की है। इन फैसलों के बाद श्रमिकों ने अपना विरोध समाप्त कर दिया।

हालांकि, 13 अप्रैल को एक समूह ने हिंसा भड़काने की कोशिश की। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए स्थिति को नियंत्रित कर लिया, लेकिन इसके बाद दो एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट्स ने पुलिस फायरिंग में कई लोगों की मौत की झूठी खबरें फैलानी शुरू कर दीं। जांच में पाया गया कि ये दोनों अकाउंट्स पाकिस्तान से संचालित हो रहे थे और वीपीएन का इस्तेमाल किया जा रहा था।

पुलिस ने इस मामले में दो अलग-अलग केस दर्ज किए हैं और लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और प्रशासन का सहयोग करें।

जांच के दौरान तीन मुख्य साजिशकर्ताओं रूपेश राय, मनीषा चौहान और आदित्य आनंद की पहचान की गई है। इनमें से रूपेश राय और मनीषा चौहान को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि आदित्य आनंद फरार है। पुलिस के अनुसार, ये तीनों न केवल नोएडा में मौजूद थे बल्कि भीड़ को उकसाने और हिंसा फैलाने में सक्रिय भूमिका निभा रहे थे। इनके देशभर में पूर्व के आंदोलनों से जुड़े होने के संकेत भी मिले हैं।

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि इस साजिश की योजना 31 मार्च और 1 अप्रैल को बनाई गई थी। 9 और 10 अप्रैल को क्यूआर कोड के माध्यम से लोगों को व्हाट्सऐप ग्रुप्स में जोड़ा गया, जिसके बाद 10 अप्रैल से विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ। 11 अप्रैल को सड़कों को जाम किया गया और 13 अप्रैल को एक कंपनी के बाहर बड़ी भीड़ जमा होने से स्थिति और तनावपूर्ण हो गई।

अब तक इस मामले में 13 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं और 62 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें अधिकांश बाहरी लोग बताए जा रहे हैं। खुफिया ब्यूरो और एंटी-टेररिज्म स्क्वाड जैसी केंद्रीय एजेंसियां भी पाकिस्तान कनेक्शन की जांच में जुटी हैं।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस मामले में दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कार्रवाई भी शामिल हो सकती है। नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों, विशेषकर फेज-2 में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और लगातार गश्त जारी है।

पुलिस के अनुसार, यह पूरा मामला एक सामान्य श्रमिक आंदोलन से शुरू होकर सुनियोजित तरीके से हिंसा और तोड़फोड़ में बदल दिया गया, जिसमें संगठित नेटवर्क और भ्रामक सूचना का इस्तेमाल किया गया।

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