शिखर धवन को बड़ी राहत: दिल्ली कोर्ट ने पूर्व पत्नी को दिया ब्याज़ सहित पैसे लौटाने का आदेश

पटियाला हाउस फैमिली कोर्ट ने ऑस्ट्रेलियाई अदालत के संपत्ति समझौतों को ‘शून्य और अमान्य' घोषित किया; देना होगा 9% सालाना ब्याज

शिखर धवन को बड़ी राहत: दिल्ली कोर्ट ने पूर्व पत्नी को दिया ब्याज़ सहित पैसे लौटाने का आदेश

Big relief for Shikhar Dhawan: Delhi court orders ex-wife to return money along with interest

पूर्व भारतीय सलामी बल्लेबाज शिखर धवन को दिल्ली की एक पारिवारिक अदालत से बड़ी कानूनी और आर्थिक राहत मिली है। उनकी दूसरी शादी के कुछ ही दिनों बाद पटियाला हाउस कोर्ट ने उनकी पूर्व पत्नी आयशा मुखर्जी को तलाक समझौते के तहत प्राप्त ₹5.7 करोड़ (लगभग AU$894,397) वापस लौटाने का आदेश दिया है। धवन और आयशा मुखर्जी ने 2012 में विवाह किया था और 2021 में उनका तलाक हो गया। दोनों का एक बेटा जोरावर है, जिसका जन्म 2014 में हुआ था।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार, पटियाला हाउस कोर्ट के न्यायाधीश देवेंद्र कुमार गर्ग ने कहा कि वित्तीय समझौते  धमकी, जबरन वसूली, छल और धोखाधड़ी के तहत कराए गए थे। अदालत ने पाया कि ये समझौते दबाव और कथित धोखाधड़ी के माहौल में हुए।

कोर्ट ने आदेश दिया कि मुखर्जी को वह पूरी राशि लौटानी होगी, जो उन्हें ऑस्ट्रेलिया स्थित एक संपत्ति की बिक्री से अंतरिम समझौते के तहत मिली थी। साथ ही अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि धवन द्वारा वाद दायर किए जाने की तारीख से इस रकम पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।

दिल्ली की फैमिली कोर्ट ने यह भी कहा कि ऑस्ट्रेलियाई अदालत को इस वैवाहिक विवाद की सुनवाई का अधिकार क्षेत्र (ज्यूरिस्डिक्शन) नहीं था। इसलिए वहां पारित संपत्ति संबंधी आदेशों को शून्य और अमान्य घोषित किया गया।

धवन ने अदालत में दलील दी थी कि ऑस्ट्रेलियाई अदालत द्वारा की गई धनराशि की गणना हिंदू विवाह अधिनियम और भारतीय कानून के प्रावधानों के विपरीत है। उन्होंने यह भी मांग की थी कि उन्हें विदेशी अदालत के आदेशों से बाध्य न माना जाए। कोर्ट ने उनकी दलीलों को स्वीकार करते हुए कहा कि वे ऑस्ट्रेलियाई आदेशों से बंधे नहीं हैं।

तलाक कार्यवाही के दौरान धवन ने आरोप लगाया था कि विवाह के तुरंत बाद उनकी पत्नी ने उनकी प्रतिष्ठा और क्रिकेट करियर को नुकसान पहुंचाने के लिए मनगढ़ंत, अपमानजनक और झूठी सामग्री प्रसारित करने की धमकी दी थी।धवन ने यह भी कहा कि उन्होंने अपनी निजी आय से कई संपत्तियां खरीदीं, लेकिन उन्हें संयुक्त नाम से पंजीकृत करने के लिए बाध्य किया गया। एक मामले में, जिस संपत्ति को उन्होंने खरीदा था, उसमें उनकी पत्नी को 99 प्रतिशत मालिक के रूप में दर्ज किया गया।

2021 से 2024 के बीच ऑस्ट्रेलियाई अदालत ने संपत्ति विभाजन को लेकर कई आदेश पारित किए थे। हालांकि अब दिल्ली की फैमिली कोर्ट के फैसले के बाद वे आदेश भारत में प्रभावी नहीं रहेंगे। इस फैसले को धवन के लिए बड़ी कानूनी जीत के रूप में देखा जा रहा है, जिससे लंबे समय से चल रहे संपत्ति विवाद में उन्हें महत्वपूर्ण राहत मिली है।

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