भारत ने चीन की अत्याधुनिक वायु से वायु में मार करने वाली PL-15E मिसाइल के कई अहम तकनीकी रहस्यों को समझने में बड़ी सफलता हासिल की है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, भारतीय इंजीनियरों और रक्षा विशेषज्ञों ने पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बरामद हुई इस मिसाइल के मलबे का गहन अध्ययन किया, जिससे इसकी ट्रैकिंग, रडार और टार्गेटिंग तकनीक से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं।
बताया जा रहा है कि यह मिसाइल 6-7 मई की दरम्यानी रात भारतीय सैन्य कार्रवाई के दौरान पंजाब के होशियारपुर इलाके में गिरी थी। उस समय इसे चीन की सबसे उन्नत बीवीआर (Beyond Visual Range) मिसाइलों में से एक माना गया था और रक्षा विशेषज्ञों ने कहा था कि यदि इसका कोई हिस्सा सही-सलामत बरामद होता है तो यह भारत के लिए बड़ी खुफिया सफलता साबित हो सकती है।
🇮🇳⚡️|| India Cracks Chinese PL-15E Missile Secrets; DRDO, IAF Upgrade Tejas, Su-30MKI and Rafale EW Suites: French Media
• According to French outlet Meta-Defense , India's Defence Research and Development Organisation and Indian Air Force have reportedly decoded key radar,… pic.twitter.com/6GNx9MWiGg
— Miran🇮🇳 (@Miran7g) May 21, 2026
अब मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि भारतीय वैज्ञानिकों ने मिसाइल के कई महत्वपूर्ण तकनीकी पहलुओं को समझ लिया है। फ्रांसीसी मीडिया रिपोर्टों के हवाले से कहा गया है कि भारत ने PL-15E की रडार और गाइडेंस प्रणाली का विश्लेषण कर उसे अपने स्वदेशी इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम के साथ जोड़ दिया है। यही सिस्टम अब स्वदेशी लड़ाकू विमान HAL तेजस MK1A में लगाया जा रहा है और अपग्रेड हो रहे सुखोई Su-30MKI सुखोई-30MKI विमानों में भी इसका इस्तेमाल किया जाएगा।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि इससे भारतीय वायुसेना को भविष्य में पाकिस्तान द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली PL-15E मिसाइलों का मुकाबला करने और उन्हें जाम या निष्क्रिय करने में मदद मिल सकती है। वहीं फ्रांस निर्मित राफेल विमानों में पहले से ही उन्नत इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम मौजूद हैं।
सूत्रों के अनुसार, रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) अब अपने स्वदेशी अस्त्रा मार्क-2 मिसाइल कार्यक्रम में भी PL-15E से जुड़ी कुछ उन्नत तकनीकी विशेषताओं को शामिल करने पर काम कर रहा है। अस्त्रा मार्क-2 को 200 किलोमीटर से अधिक मारक क्षमता वाली अगली पीढ़ी की एयर-टू-एयर मिसाइल के रूप में विकसित किया जा रहा है।
रिपोर्टों में कहा गया है कि भारत को कई क्षतिग्रस्त PL-15 मिसाइलें मिली थीं, जबकि 9 मई को होशियारपुर के एक खेत से एक PL-15E लगभग सही-सलामत हालत में बरामद की गई थी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे मिसाइल के AESA रडार, उन्नत प्रणोदन प्रणाली, एंटी-जैमिंग क्षमता और मैक-5 से अधिक गति बनाए रखने की तकनीक के बारे में अहम जानकारी मिली होगी।
The recovery of an almost intact Chinese PL-15 air to air missile is an intelligence coup for India. This missile, fired by a Pak fighter (J-10 or JF-17) flew more than 100 kms to land in the Hoshiarpur area. This missile will be opened up and inspected – the findings could end… https://t.co/oKllhUDBCR
— Vishnu Som (@VishnuNDTV) May 9, 2025
चीन की PL-15E मिसाइल को फ्रांस की मिटियोर मिसाइल का प्रतिद्वंद्वी माना जाता है। इसकी मारक क्षमता 100 से 150 किलोमीटर के बीच बताई जाती है। यह मिसाइल बीच रास्ते में अपना मार्ग बदल सकती है और आधुनिक AESA रडार सिस्टम को भी चुनौती देने की क्षमता रखती है। इसमें 20 से 25 किलोग्राम तक विस्फोटक ले जाने की क्षमता है और इसका कुल वजन करीब 210 किलोग्राम बताया जाता है।
दिलचस्प बात यह है कि इस मिसाइल में आत्म-विनाश प्रणाली नहीं है। यानी यदि यह अपने लक्ष्य को नहीं भेदती, तो भी पूरी तरह नष्ट नहीं होती। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इसी वजह से भारत को इसके संवेदनशील तकनीकी हिस्सों तक पहुंच मिली।
यूरेशियन टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, फ्रांस, जापान और अमेरिका भी इस मिसाइल की तकनीक को समझने में रुचि रखते हैं। माना जा रहा है कि ये देश इसके रडार सिग्नेचर, मार्गदर्शन तकनीक और मोटर सिस्टम की क्षमताओं का अध्ययन करना चाहते हैं।
वहीं पाकिस्तान ने भी उस समय प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्वीकार किया था कि भारत के साथ हुई हवाई झड़पों में चीन निर्मित J-10 और JF-17 लड़ाकू विमानों के साथ PL-15 मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया था। रिपोर्टों के मुताबिक पाकिस्तान अपनी लगभग 80 प्रतिशत रक्षा खरीद के लिए चीन पर निर्भर है।
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