मुंबई उच्च न्यायालय: हवाई अड्डे के पास नमाज़ के लिए जगह के मांग की याचिका खारिज

उच्च न्यायालय ने कहा, "आप यह नहीं कह सकते कि आप अपनी नमाज़ सिर्फ यहीं अदा करेंगे।"

मुंबई उच्च न्यायालय: हवाई अड्डे के पास नमाज़ के लिए जगह के मांग की याचिका खारिज

Bombay High Court: Plea seeking space for Namaz near airport dismissed

मुंबई उच्च न्यायलय ने छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास नमाज़ के लिए जगह देने की मांग वाली याचिका को गुरुवार (5 मार्च) को खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि हवाईअड्डे की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता और धार्मिक अधिकार के नाम पर किसी विशेष स्थान पर नमाज़ पढ़ने का दावा नहीं किया जा सकता।

यह याचिका टैक्सी-रिक्शा ओला-उबर चालक संघ की ओर से दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से अनुरोध किया था कि रमज़ान के महीने में टैक्सी और ऑटो चालक नमाज़ अदा कर सकें, इसके लिए हवाईअड्डे के पास लगभग 1500 वर्ग फुट का स्थान या उसी क्षेत्र में कोई वैकल्पिक जगह उपलब्ध कराई जाए।

याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति बी. पी. कोलाबावाला और न्यायमूर्ति  फिरदौस पूनीवाला की खंडपीठ ने कहा कि जब सुरक्षा का प्रश्न सामने हो तो उसे सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। अदालत ने कहा, “जब सुरक्षा जोखिम होता है, तब सुरक्षा पहले आती है, चाहे मामला किसी भी धर्म से जुड़ा क्यों न हो। सुरक्षा के मामले में हम ज़रा भी समझौता नहीं करेंगे।”

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त सरकारी वकील ज्योति चव्हाण ने अदालत को बताया कि जिस अस्थायी ढांचे में नमाज़ पढ़ी जाती थी, वह VIP प्रवेश द्वार के पास स्थित था। कई आतंकवाद निरोधक इकाई (ATS) सहीत कई एजेंसियों ने इसे सुरक्षा के लिहाज से जोखिमपूर्ण बताया था।

इसके बाद उस अस्थायी ढांचे को अप्रैल 2025 में मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण द्वारा हटा दिया गया था।

वहीं विमानतल प्रबंधन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताविक्रम नानकानी ने अदालत को बताया कि मुंबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा लिमिटेड ने आसपास सात वैकल्पिक स्थानों का सर्वे किया, लेकिन भीड़भाड़, सुरक्षा चिंताओं और हवाईअड्डे के विकास योजनाओं के कारण कोई भी स्थान उपयुक्त नहीं पाया गया।

अदालत ने यह भी कहा कि रमज़ान इस्लाम का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि किसी भी स्थान पर नमाज़ पढ़ने का अधिकार स्वतः मिल जाता है। अदालत ने टिप्पणी की, आप यह नहीं कह सकते कि आप अपनी नमाज़ सिर्फ यहीं अदा करेंगे।” पीठ ने यह भी कहा कि क्षेत्र में ड्राइवरों के पार्किंग स्थल से पैदल दूरी पर मस्जिदें और अन्य धार्मिक स्थल उपलब्ध हैं, जहां लोग नमाज़ अदा कर सकते हैं।

याचिकाकर्ताओं ने यह भी तर्क दिया था कि उसी क्षेत्र में एक मंदिर मौजूद है। इस पर अदालत ने कहा कि यदि कोई अन्य अवैध ढांचा है तो वह भी कानूनी कार्रवाई के दायरे में आएगा। अदालत ने कहा,  “भले ही हम यह मान लें कि वहां एक मंदिर है, फिर भी दो गलतियां मिलकर एक सही नहीं बनातीं।” अंततः अदालत ने स्पष्ट किया कि धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार किसी संवेदनशील या सार्वजनिक स्थान के उपयोग का स्वतः अधिकार नहीं देता, विशेषकर तब जब उससे सुरक्षा संबंधी खतरे पैदा होते हों।

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