नीट पेपर लीक के विरोध प्रदर्शन के बाद चर्चा में आई कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) अब अपने ही संगठन के भीतर उठे विवाद को लेकर सुर्खियों में है। महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके के घर के बाहर दो कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारी कार्यकर्ताओं का आरोप है कि संगठन की कोर कमेटी के गठन में पक्षपात और भाई-भतीजावाद किया जा रहा है तथा जंतर-मंतर छात्र आंदोलन के दौरान लंबे समय तक सक्रिय रहे वालंटियर्स और कोऑर्डिनेटर्स को निर्णय प्रक्रिया से बाहर रखा जा रहा है।
कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज कर दिया
उनका कहना है कि आंदोलन किसी एक व्यक्ति का नहीं बल्कि पूरे देश के युवाओं का था, इसलिए संगठन के फैसले भी लोकतांत्रिक और पारदर्शी तरीके से होने चाहिए। प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने जंतर-मंतर छात्र आंदोलन के दौरान लगातार सक्रिय भूमिका निभाई और कई दिनों तक आंदोलन का हिस्सा रहे। उनका आरोप है कि हाल ही में आयोजित कोर कमेटी की बैठक में केवल चुनिंदा लोगों को बुलाया गया, जबकि आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले कई कार्यकर्ताओं और कोऑर्डिनेटर्स को नजरअंदाज कर दिया गया।
प्रदर्शनकारियों के अनुसार, जंतर-मंतर आंदोलन से सैकड़ों लोग समन्वयक के रूप में जुड़े थे, लेकिन उन्हें संगठन की बैठकों और निर्णय प्रक्रिया में शामिल नहीं किया गया। उनका कहना है कि आंदोलन को सफल बनाने वाले जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी संगठन के भीतर असंतोष पैदा कर रही है।
करीबी लोगों को जिम्मेदारियाँ
विरोध प्रदर्शन कर रहे CJP कार्यकर्ता मनीष ब्रह्मभट्ट ने मीडिया से बातचीत में कहा, “एक ग्रुप बनाया गया है और सभी इस बात से सहमत हैं कि अगर चीजें लोकतांत्रिक तरीके से आगे बढ़ें, तो इससे देश का भला होगा। हमें आपके सामने यह बयान देने की जरूरत नहीं थी, हमें इसका बुरा लग रहा है। लेकिन जब तक हम आवाज नहीं उठाते, हमारी बात सुनी नहीं जाती। हमें यह बात देर रात करीब 1:00 बजे महसूस हुई और तभी हमें यह कदम उठाना पड़ा। आज से हम तब तक अन्न-जल त्याग रहे हैं जब तक कि लोकतांत्रिक तरीके से टीम बनाकर सभी फैसले पारदर्शी रूप से नहीं लिए जाते। तब तक हम इस आंदोलन को देश का सच्चा आंदोलन नहीं कह सकते।”
उनका आरोप है कि आंदोलन के दौरान लाठियां खाने और लंबे समय तक मैदान में डटे रहने वाले लोगों को दरकिनार कर केवल करीबी लोगों को जिम्मेदारियाँ दी जा रही हैं। कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि जब तक संगठन में पारदर्शिता नहीं लाई जाती, सभी समर्पित वालंटियर्स को उचित प्रतिनिधित्व नहीं दिया जाता और फैसले लोकतांत्रिक तरीके से नहीं लिए जाते, तब तक उनका धरना और अनशन जारी रहेगा।
