डावखरे ने कहा कि घोड़बंदर क्षेत्र को पुर्तगालियों के कब्जे से मुक्त कराने के लिए वीर चिमाजी अप्पा ने जो अद्भुत संघर्ष और बलिदान दिया था, उसे आज की पीढ़ी तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है। उनके नाम पर सड़क का नामकरण उस महान योद्धा को सच्ची और सार्थक श्रद्धांजलि होगी।
इस संबंध में प्रस्ताव अब महानगरपालिका के समक्ष प्रस्तुत किया जा चुका है। अभियान से जुड़े लोगों को उम्मीद है कि इस प्रस्ताव को शीघ्र स्वीकृति मिलेगी, ताकि इतिहास के इस गौरवशाली अध्याय को उसका उचित सम्मान प्राप्त हो सके।
ज्ञात हो कि पेशवा बाजीराव प्रथम के छोटे भाई और सेनापति वीर चिमाजी अप्पा ने वर्षों तक चले संघर्ष के बाद पुर्तगालियों के कब्जे वाले अनेक किलों को मुक्त कराया था। इसी अभियान के दौरान उन्होंने घोड़बंदर क्षेत्र को भी विदेशी शासन से आजाद कराया। आज का घोड़बंदर उसी ऐतिहासिक विरासत का साक्षी है।
इसी क्रम में संग्राम फाउंडेशन के अध्यक्ष गोपाल सिंह और महासचिव दीपक कुमार त्रिपाठी ने पुणे में पेशवा वंशज पुष्करराव पेशवा से मुलाकात कर उन्हें इस अभियान की जानकारी दी। अभियान की भावना और उद्देश्य को सुनकर पुष्करराव पेशवा भावुक हो गए और उन्होंने इस मांग का समर्थन करते हुए कहा कि इतिहास के महान योद्धाओं को उचित सम्मान दिलाने के लिए वे हर संभव सहयोग देने को तैयार हैं।
गोपाल सिंह और दीपक कुमार त्रिपाठी ने कहा कि यह अभियान केवल एक सड़क का नाम बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत के गौरवशाली इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास है। उनका विश्वास है कि वीर चिमाजी अप्पा के नाम पर सड़क का नामकरण युवाओं को अपने इतिहास, संस्कृति और राष्ट्रनायकों के प्रति गर्व की भावना से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
उन्होंने आशा व्यक्त की कि महानगरपालिका इस ऐतिहासिक और जनभावनाओं से जुड़े प्रस्ताव को जल्द स्वीकृति प्रदान करेगी, जिससे मराठा साम्राज्य के इस महान सेनानायक को वह सम्मान मिल सके जिसके वे वास्तविक रूप से अधिकारी हैं।
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