एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अफगानिस्तान की राजधानी काबुल स्थित नशा मुक्ति पुनर्वास केंद्र पर पाकिस्तान द्वारा किए गए हालिया हवाई हमले को लेकर अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के संदर्भ में गंभीर चिंता व्यक्त की है। इस हमले में 400 से अधिक लोगों के मारे जाने और 200 से अधिक नागरिकों के घायल होने की जानकारी सामने आई है।
पाकिस्तानी अधिकारियों ने दावा किया था कि 16 मार्च को काबुल में किए गए इस हवाई हमले का निशाना एक कथित हथियार भंडार था। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए एमनेस्टी इंटरनेशनल की दक्षिण एशिया उप-क्षेत्रीय निदेशक इसाबेल लासी ने कहा कि पाकिस्तान की सेना ने नागरिकों को होने वाले नुकसान से बचाने के लिए आवश्यक सावधानियां नहीं बरतीं।
एमनेस्टी इंटरनेशनल के अनुसार, पाकिस्तान ने 16 मार्च को “ऑपरेशन गजब लिल हक” के तहत काबुल और नंगरहार में हवाई हमले किए। इन हमलों में काबुल के ‘ओमिद एडिक्शन ट्रीटमेंट हॉस्पिटल’ को निशाना बनाया गया। यह केंद्र 2016 में ‘कैंप फीनिक्स’ की जगह स्थापित किया गया था, जो पहले अमेरिका और NATO का सैन्य अड्डा था और अफगान राजधानी के बाहरी इलाके में स्थित है।
जानकारी के अनुसार, इस पुनर्वास केंद्र और आसपास के क्षेत्र में लगभग 2000 लोगों के रहने की क्षमता थी। अफगान अधिकारियों के मुताबिक, इस हमले में 400 से अधिक नागरिकों की मौत हुई और 200 से ज्यादा घायल हुए। इसाबेल लासी ने कहा कि मृतकों की संख्या का स्वतंत्र सत्यापन अभी बाकी है, लेकिन यह स्पष्ट है कि इस हमले में बड़ी संख्या में नागरिक हताहत हुए हैं।
उन्होंने कहा, “पूर्व में नाटो का ‘कैंप फीनिक्स’ 2016 से बड़े स्तर पर नशा मुक्ति केंद्र के रूप में कार्य कर रहा है। ऐसे में हमला करने से पहले पाकिस्तान की सेना को नागरिकों और नागरिक स्थलों की सुरक्षा के लिए हर संभव एहतियात बरतनी चाहिए थी। यदि सही तरीके से जांच और जानकारी एकत्र की जाती, तो वहां बड़ी संख्या में नागरिकों की मौजूदगी स्पष्ट हो जाती।”
उन्होंने यह भी कहा कि यदि वहां कहीं हथियारों का भंडार था, तब भी हमले से पहले संभावित नागरिक नुकसान का आकलन करना जरूरी था।
इसाबेल लासी ने पाकिस्तान के अधिकारियों से मांग की कि वे स्पष्ट करें कि इस कार्रवाई के लिए किस खुफिया जानकारी का इस्तेमाल किया गया और उसकी पुष्टि कैसे की गई। साथ ही, उन्होंने इस हमले और इससे हुई नागरिक हानि की स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कर उसके निष्कर्ष सार्वजनिक करने की मांग की, ताकि जवाबदेही तय की जा सके।
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने संघर्ष में शामिल सभी पक्षों से अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का सख्ती से पालन करने और नागरिकों व नागरिक ढांचे की सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाने की अपील की है। विशेष रूप से अस्पतालों और स्वास्थ्य सुविधाओं की सुरक्षा पर जोर दिया गया है।
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