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गुजरात: बैटमैन ने लगाई थी पुलिस की गाडी में आग!

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गुजरात हाईकोर्ट ने अहमदाबाद में दो वर्ष पहले पुलिस की जीप को आग लगाए जाने के मामले में दर्ज FIR रद्द करने की मांग वाली याचिका पर सोमवार(2 दिसंबर) को राज्य सरकार को नोटिस जारी किया। 48 वर्षीय आरोपी ने अदालत को बताया कि वह बाइपोलर डिसऑर्डर से ग्रस्त है और घटना के दिन खुद को ‘बैटमैन’ समझ रहा था। यह घटना 10 सितंबर 2023 को एलिसब्रिज पुलिस स्टेशन के पास हुई थी।

जस्टिस वी.के. व्यास ने याचिकाकर्ता के पक्ष में पेश वकील के तर्कों को सुनने के बाद राज्य सरकार और उस समय के एलिसब्रिज पुलिस सब-इंस्पेक्टर को नोटिस भेजा। वरिष्ठ वकील ने अदालत में मेडिकल रिकॉर्ड पेश किए, जिनमें बताया गया कि व्यक्ति 2017 से बाइपोलर डिसऑर्डर (साइकोटिक फीचर्स के साथ) का इलाज ले रहा है और उसकी वृद्ध मां उसकी देखभाल करती है। डिफेन्स वकील ने तर्क दिया कि पुलिस ने चार्जशीट में ये मेडिकल दस्तावेज शामिल नहीं किए, जिससे यह साबित करना मुश्किल हो गया कि घटना के समय उसकी मानसिक स्थिति सामान्य नहीं थी।

वकील ने बताया कि बाइपोलर डिसऑर्डर में रोगी कभी अत्यधिक उत्साहित, कभी आक्रामक और कई बार किसी अन्य व्यक्ति जैसा महसूस करने लगता है। घटना के दिन आरोपी को लग रहा था कि वह ‘बैटमैन’ है। उसका घर पुलिस स्टेशन के बगल में है। वह जीप तक गया, कुछ कागज उठाए, उन्हें जलाया और वाहन में डालकर वहां से चला गया।

घटना के तुरंत बाद पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर उसे उसी दिन गिरफ्तार कर लिया। वीडियो में दिखा कि आरोपी ने अपनी दोपहिया वाहन को पुल के नीचे खड़ा किया, पुलिस जीप का दरवाज़ा खोला, ज्वलनशील सामग्री डाली और आग लगा दी। वाहन के नंबर से उसकी पहचान अल डोनाल्ड मार्कस के रूप में हुई। अगले दिन उसे मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया और उसे जमानत मिल गई। उस समय उसने पुलिस को कहा था कि उसने यह “शोहरत पाने” के लिए किया।

इसके बाद वह अस्पताल और फिर बेंगलुरु के एक रिहैब सेंटर में भर्ती रहा। अदालत ने उसे निर्देश दिया कि वह भारतीय न्याय सुरक्षा संहिता, 2023 के तहत मजिस्ट्रेट के समक्ष आवेदन दे, ताकि यह जांच हो सके कि घटना के समय उसकी मानसिक स्थिति क्या थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय मजिस्ट्रेट को करना होगा कि आरोपी घटना के वक्त “सही मानसिक अवस्था” में था या नहीं। गुजरात हाईकोर्ट इस मामले की अगली सुनवाई 16 दिसंबर को करेगा।

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