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भारत में नॉन-कॉन्टैक्ट वॉरफेयर की तैयारी तेज: ₹2.19 लाख करोड़ के 6 बड़े रक्षा प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू

Anant Shastra केंद्र में

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भारत तेजी से बदलते वैश्विक युद्ध परिदृश्य को देखते हुए अपनी सैन्य रणनीति में बड़ा बदलाव कर रहा है। देश ने नॉन-कॉन्टैक्ट वॉरफेयर (बिना सीधे आमने-सामने की लड़ाई) की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ₹2.19 लाख करोड़ के छह बड़े रक्षा प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू कर दिया है। इन परियोजनाओं में अत्याधुनिक Anant Shastra प्रणाली प्रमुख भूमिका निभा रही है।

संसद में पेश रक्षा समिति की रिपोर्ट के अनुसार, यह पहल भविष्य की चुनौतियों, जैसे ड्रोन हमले, हाइपरसोनिक हथियार और साइबर युद्ध का मुकाबला करने के लिए की जा रही है।

‘Anant Shastra’ से मजबूत होगी हवाई सुरक्षा:

Anant Shastra एक क्विक रिएक्शन सरफेस-टू-एयर मिसाइल (QRSAM) प्रणाली है, जिसे दुश्मन के ड्रोन और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले खतरों को तेजी से निष्क्रिय करने के लिए विकसित किया जा रहा है। इसकी तेज प्रतिक्रिया क्षमता आधुनिक असममित युद्ध (asymmetric warfare) में भारत की हवाई रक्षा को मजबूत करेगी।

इसके साथ ही स्वदेशी लंबी दुरी की सतह से हवा में हमला करने वाली मिसाइल (LRSAM) पर भी काम जारी है, जो S-400 जैसी क्षमताओं से प्रेरित है। यह प्रणाली लंबी दूरी से दुश्मन के विमान, मिसाइल और बैलिस्टिक खतरों को इंटरसेप्ट करने में सक्षम होगी।

फाइटर जेट और भविष्य की तकनीक पर फोकस

इसी बीच भारत का पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर जेट एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) अब डिजाइन चरण से आगे बढ़कर विकास के चरण में पहुंच चुका है। इसके निर्माण और स्वदेशी इंजन के विकास पर भी काम जारी है।

इसके अलावा, छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की अवधारणा पर भी विचार किया जा रहा है, जो हाइपरसोनिक गति, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और C4ISR सिस्टम से लैस “फ्लाइंग कमांड सेंटर” के रूप में काम करेंगे। ये प्लेटफॉर्म बिना सीमा पार किए दुश्मन पर सटीक हमले करने में सक्षम होंगे।

नौसेना, साइबर और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध पर जोर

नौसेना के लिए एडवांस्ड टॉरपीडो डिफेंस सिस्टम और एंटी-ड्रोन तकनीकों पर काम किया जा रहा है। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर (EW) सिस्टम को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे दुश्मन के संचार और सेंसर सिस्टम को बाधित किया जा सके।

साइबर सुरक्षा और एआई आधारित हथियारों के विकास के लिए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के बजट का बड़ा हिस्सा आवंटित किया गया है, ताकि भविष्य के साइबर हमलों और स्वचालित खतरों का समय रहते जवाब दिया जा सके।

मिसाइल सिस्टम में अपग्रेड और बजट में बड़ा इजाफा

भारत अस्त्र, नाग और ध्रुवास्त्र जैसी मिसाइलों के Mark-II वर्जन पर भी काम कर रहा है, जिससे उनकी रेंज, सटीकता और मारक क्षमता बढ़ेगी।

वित्त वर्ष 2026-27 के लिए रक्षा निवेश बजट ₹2,19,306.47 करोड़ रखा गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 21.84% अधिक है। वहीं कुल रक्षा बजट ₹7.84 लाख करोड़ तक पहुंच गया है, जिसकी घोषणा वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने 1 फरवरी को की थी।

यह रक्षा विस्तार ऑपरेशन सिंदूर के बाद और तेज हुआ, जिसे 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम आतंकी हमले के बाद शुरू किया गया था। इस ऑपरेशन ने आधुनिक युद्ध में नई चुनौतियों को उजागर किया, जिससे रक्षा निवेश में तेजी लाई गई।

सरकार की ‘आत्मनिर्भर भारत’ नीति के तहत इन परियोजनाओं में निजी क्षेत्र की भागीदारी और स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा दिया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल भारत को न केवल रक्षा में आत्मनिर्भर बनाएगी, बल्कि भविष्य के युद्धों में रणनीतिक बढ़त भी दिलाएगी।

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