भारत ने किया रूस के साथ Shtil-1 मिसाइल खरीद का समझौता

भारतीय नौसेना के शिवालिक-क्लास फ्रिगेट और तलवार-क्लास फ्रिगेट युद्धपोतों पर पहले से तैनात है Shtil-1 मिसाइल

भारत ने किया रूस के साथ Shtil-1 मिसाइल खरीद का समझौता

India signs deal with Russia to purchase Shtil-1 missile

भारतीय नौसेना ने अपने बेड़े की वायु रक्षा क्षमता को और सुदृढ़ करने के लिए रूस के साथ ₹2,182 करोड़ (करीब 230 मिलियन डॉलर) का रक्षा समझौता किया है। यह समझौता मंगलवार (3 मार्च) को रक्षा मंत्रालय और रूस की सरकारी रक्षा निर्यात एजेंसी JSC रोसोबोरोनएक्सपोर्ट के बीच हस्ताक्षरित किया गया। यह डील कुल ₹5,083 करोड़ के व्यापक रक्षा पैकेज का हिस्सा है, जिसमें तटरक्षक बल के लिए उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर भी शामिल हैं।

इस अनुबंध के तहत नौसेना को उन्नत ‘श्तिल’ सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली (Shtil-1) और उससे संबंधित मिसाइल होल्डिंग फ्रेम प्राप्त होंगे। Shtil-1 प्रणाली पहले से ही भारतीय नौसेना के शिवालिक-क्लास फ्रिगेट और तलवार-क्लास फ्रिगेट युद्धपोतों पर तैनात है। यह वर्टिकल लॉन्च सिस्टम (VLS) से लैस है और 50 से 70 किलोमीटर तक की दूरी पर हवाई खतरों को भेदने में सक्षम है।

इस प्रणाली में 9M317ME प्रकार की मिसाइलों का उपयोग किया जाता है, जो मैक 4 से अधिक की गति प्राप्त कर सकती हैं। यह एक साथ 12 लक्ष्यों को ट्रैक करने में सक्षम है और विमान, हेलीकॉप्टर, एंटी-शिप मिसाइलों तथा समुद्र की सतह के करीब उड़ने वाले खतरों के खिलाफ प्रभावी सुरक्षा प्रदान करती है। प्रति दो सेकंड में एक मिसाइल दागने की क्षमता इसे बहु-दिशात्मक हमलों के दौरान निर्णायक बढ़त देती है।

नौसेना के अनुसार, यह खरीद मौजूदा युद्धपोतों पर तैनात मिसाइल भंडार को पुनः भरने और उन्नत करने के लिए आवश्यक थी। हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती सामरिक गतिविधियों और प्रमुख शक्तियों की बढ़ती नौसैनिक तैनाती के बीच यह कदम बेड़े की जीवटता और बहु-स्तरीय वायु रक्षा क्षमता को मजबूत करेगा।

रूस के रक्षा निर्यात ढांचे में शामिल रोसोबोरोनएक्सपोर्ट भारत का लंबे समय से साझेदार रहा है। हाल ही में भारतीय नौसेना को सौंपी गई स्टील्थ फ्रिगेट INS तमाल में भी 24 Shtil-1 सेल और ब्रह्मोस मिसाइलें तैनात हैं। यह सौदा भारत-रूस रक्षा सहयोग की निरंतरता को दर्शाता है, जबकि भारत समानांतर रूप से अमेरिका, फ्रांस और इज़राइल जैसे देशों के साथ भी रक्षा सहयोग बढ़ा रहा है।

डिलीवरी 18 से 30 महीनों के भीतर होने की संभावना है, जिसके बाद चयनित फ्रिगेट्स पर एकीकरण परीक्षण किए जाएंगे। नौसेना का लक्ष्य 2027 के अंत तक पूरे बेड़े में इन मिसाइलों की तैनाती सुनिश्चित करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की विकसित हो रही हवाई मारक क्षमता और चीन की विमानवाहक पोत आधारित रणनीति को देखते हुए यह सौदा समयोचित है। यह अनुबंध न केवल मिसाइल भंडार में कमी को दूर करेगा, बल्कि भारत की समुद्री सुरक्षा रणनीति में व्यावहारिक और संतुलित दृष्टिकोण को भी रेखांकित करता है।

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