स्क्वाड्रन संकट के चलते भारतीय वायुसेना का बड़ा फैसला; मिराज-2000 की सेवा अवधि बढ़ाई

स्क्वाड्रन संकट के चलते भारतीय वायुसेना का बड़ा फैसला; मिराज-2000 की सेवा अवधि बढ़ाई

Indian Air Force takes major decision due to squadron crisis; Mirage-2000 service life extended

स्क्वाड्रन की कमी और नए लड़ाकू विमानों की देरी से हो रही तैनाती के बीच भारतीय वायुसेना (IAF) ने अपने प्रमुख लड़ाकू विमान मिराज2000 की सेवा अवधि 2038-39 तक बढ़ाने का फैसला किया है। यह फैसला पहले तय 2035 के सेवा समाप्ती योजना को संशोधित करते हुए लिया गया है, ताकि वायुसेना की ऑपरेशनल क्षमता में किसी बड़े अंतर को रोका जा सके।

गौरतलब है कि 2019 में बालाकोट एयरस्ट्राइक के दौरान मिराज-2000 विमानों ने अहम भूमिका निभाई थी। ऑपरेशन बंदर के तहत 12 मिराज-2000 “वज्र” फाइटर्स ने रात में सटीक हमले कर आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था। इस ऑपरेशन में SPICE-2000 गाइडेड बमों का इस्तेमाल किया गया, जिनकी मारक क्षमता लगभग 60 किमी स्टैंड-ऑफ रेंज तक है।

IAF के पास वर्तमान में करीब 31 फाइटर स्क्वाड्रन हैं, जबकि दो-फ्रंट (China और Pakistan) खतरे से निपटने के लिए 42 स्क्वाड्रन की आवश्यकता मानी जाती है। अनुमान के अनुसार, भारत के पास लगभग 600 कॉम्बैट एयरक्राफ्ट हैं, जबकि संभावित विरोधियों के पास यह संख्या 1000 से अधिक है।

वायुसेना प्रमुख अमर प्रीत सिंग ने भी संकेत दिया है कि बदलते सुरक्षा परिदृश्य में आवश्यक स्क्वाड्रन संख्या और बढ़ सकती है। ऐसे में मिराज-2000 जैसे अनुभवी प्लेटफॉर्म को बनाए रखना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मिराज-2000 के तीन स्क्वाड्रनों को आधुनिक रडार, एवियोनिक्स और मिसाइल सिस्टम से अपग्रेड किया गया है, जिससे इसकी मल्टीरोल क्षमता बरकरार है। यह विमान इंटरसेप्शन और स्ट्राइक दोनों तरह के मिशन में सक्षम है और F-16 फाइटिंग फाल्कन तथा चेंगडु J-10 जैसे विमानों के मुकाबले में प्रभावी बना हुआ है।

इस विस्तार को डस्सॉल्ट एविएशन का समर्थन भी मिला है, जो 2035 के बाद भी तकनीकी सहायता और स्पेयर पार्ट्स उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही, वैश्विक स्तर पर रिटायर हो रहे विमानों से मिलने वाले अतिरिक्त पुर्जे (spares) भी इस बेड़े की उपलब्धता बनाए रखने में मदद करेंगे।

यह फैसला केवल संख्या बनाए रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि रणनीतिक लचीलापन सुनिश्चित करने के लिए भी अहम है। इससे राफेल और HAL तेजस Mk2 जैसे नए प्लेटफॉर्म के पूरी तरह तैयार होने तक एक मजबूत “सेफ्टी नेट” बना रहेगा।

इस बीच, 114 मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) कार्यक्रम भी आगे बढ़ रहा है, लेकिन इसकी डिलीवरी में अभी समय लगेगा। ऐसे में मिराज-2000 का विस्तारित उपयोग IAF की ऑपरेशनल क्षमता को बनाए रखने में निर्णायक भूमिका निभाएगा।

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