भारत की समुद्री सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को नई मजबूती देने जा रही अत्याधुनिक स्टील्थ फ्रिगेट INS तारागिरी को 3 अप्रैल को औपचारिक रूप से भारतीय नौसेना में शामिल किया जाएगा। विशाखापत्तनम में आयोजित होने वाले इस भव्य समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंग मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे।
यह युद्धपोत भारत की स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षमता और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है। INS तारागिरी को 28 नवंबर 2025 को मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) ने नौसेना को सौंपा था। यह प्रोजेक्ट 17A के नीलगिरी-क्लास फ्रिगेट्स की चौथी और MDL द्वारा निर्मित तीसरी जहाज है।
इस अत्याधुनिक युद्धपोत को वारशिप डिजाइन ब्यूरो ने डिजाइन किया है और इसे ‘इंटीग्रेटेड कंस्ट्रक्शन’ मॉडल के तहत तैयार किया गया, जिससे निर्माण समय को कम करते हुए इसे 81 महीनों में पूरा किया गया। इससे पहले लीड शिप नीलगिरी को बनने में 93 महीने लगे थे। इस परियोजना में 75% से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है और 200 से अधिक MSMEs की भागीदारी रही, जिससे हजारों लोगों को रोजगार भी मिला।
करीब 6,670 टन वजनी INS तारागिरी अत्याधुनिक CODOG (Combined Diesel or Gas) प्रोपल्शन सिस्टम से लैस है, जो इसे तेज गति और लंबी दूरी तक ऑपरेशन करने में सक्षम बनाता है। इसमें ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइलें, MF-STAR रडार, MRSAM एयर डिफेंस सिस्टम, 76mm गन, क्लोज-इन वेपन सिस्टम, रॉकेट्स और टॉरपीडो जैसे अत्याधुनिक हथियार शामिल हैं।
इन सभी सिस्टम्स को एक आधुनिक कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम और इंटीग्रेटेड प्लेटफॉर्म मैनेजमेंट सिस्टम के जरिए जोड़ा गया है, जिससे युद्ध के दौरान तेज और सटीक प्रतिक्रिया संभव हो पाती है।
गौरतलब है कि INS तारागिरी नाम भारतीय नौसेना के पुराने लींडर-क्लास फ्रिगेट से लिया गया है, जिसने 1980 से 2013 तक देश की सेवा की थी। नई तारागिरी उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए और अधिक उन्नत तकनीक के साथ नौसेना में शामिल हो रही है।
यह युद्धपोत केवल युद्ध संचालन ही नहीं, बल्कि मानवीय सहायता और आपदा राहत जैसे मिशनों में भी अहम भूमिका निभाने में सक्षम है। इसके साथ ही, अगस्त 2026 तक प्रोजेक्ट 17A के तीन और युद्धपोत नौसेना को मिलने की उम्मीद है।
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