भारतीय सेना अपनी आर्टिलरी ताकत को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सेना स्वदेशी पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर (MBRL) सिस्टम की तैनाती को चीन और पाकिस्तान से सटी सीमाओं पर तेजी से बढ़ा रही है। यह कदम उत्तरी और पश्चिमी मोर्चों पर लगातार बनी सुरक्षा चुनौतियों के मद्देनज़र उठाया गया है।
हाल ही में एक नई यूनिट के ऑपरेशनल होने के बाद इन संवेदनशील क्षेत्रों में पिनाका की कुल सात सक्रिय रेजिमेंट तैनात हो चुकी हैं। यह विस्तार यहीं नहीं रुकने वाला है। सेना की आठवीं रेजिमेंट भी तेजी से तैयार की जा रही है और उसे आवश्यक उपकरणों का 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सा मिल चुका है। रक्षा अधिकारियों के अनुसार, यह यूनिट 2026 के अंत तक पूरी तरह से मिशन के लिए तैयार हो जाएगी।
दीर्घकालिक योजना के तहत अगले वर्ष दो और रेजिमेंट शामिल किए जाने की तैयारी है, जिससे कुल संख्या बढ़कर 10 हो जाएगी। हालांकि सेना का अंतिम लक्ष्य 22 पिनाका रेजिमेंट खड़ी करना है, ताकि सीमाओं पर व्यापक फायर पावर और रणनीतिक बढ़त सुनिश्चित की जा सके।
इस विस्तार की नींव अगस्त 2020 में रखी गई थी, जब रक्षा मंत्रालय ने करीब £250 मिलियन (लगभग ₹2,580 करोड़) के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए थे। इन समझौतों के तहत भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (BEML), टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और लार्सन एंड टुब्रो को छह रेजिमेंट के उत्पादन की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इससे ‘मेक इन इंडिया’ पहल को भी बल मिला है।
तकनीकी दृष्टि से भी पिनाका प्रणाली में उल्लेखनीय उन्नति हुई है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित इस सिस्टम के शुरुआती मार्क-1 संस्करण की मारक क्षमता करीब 40 किलोमीटर थी। वहीं अब गाइडेड पिनाका और लॉन्ग-रेंज गाइडेड रॉकेट्स के आने से इसकी रेंज बढ़कर 120 किलोमीटर तक पहुंच गई है।
नई पीढ़ी के ये रॉकेट सिस्टम उच्च सटीकता के साथ दुश्मन के अंदरूनी क्षेत्रों में स्थित महत्वपूर्ण ठिकानों को निशाना बनाने में सक्षम हैं। इससे भारतीय सेना को पहाड़ी और रेगिस्तानी सीमाओं पर एक मजबूत पारंपरिक प्रतिरोधक क्षमता मिलती है।
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