स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की नवीनतम ईयरबुक 2026 के अनुसार भारत ने वर्ष 2025 के दौरान अपने परमाणु शस्त्रागार का और विस्तार किया है तथा नई पीढ़ी की परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम मिसाइल प्रणालियों के विकास पर काम जारी रखा है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 की शुरुआत तक भारत के पास अनुमानित रूप से लगभग 190 परमाणु वारहेड मौजूद हैं।
8 जून को जारी SIPRI ईयरबुक में कहा गया है कि भारत का परमाणु आधुनिकीकरण कार्यक्रम अब तेजी से ऐसी लंबी दूरी की हथियार प्रणालियों के विकास पर केंद्रित हो रहा है जो चीन के भीतर दूरस्थ लक्ष्यों तक पहुंचने में सक्षम हों। हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत की सुरक्षा रणनीति में पाकिस्तान के साथ लंबे समय से चली आ रही प्रतिद्वंद्विता भी महत्वपूर्ण बनी हुई है।
रिपोर्ट में मई 2025 के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य तनाव को विशेष रूप से रेखांकित किया गया है। SIPRI ने ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े घटनाक्रम को दोनों परमाणु शक्ति संपन्न पड़ोसियों के बीच असामान्य रूप से गंभीर सैन्य संकट बताया है। संस्थान के अनुसार, इस दौरान भारत ने पाकिस्तान के उन हवाई और मिसाइल ठिकानों को निशाना बनाया था जिनकी संभावित भूमिका परमाणु ढांचे से जुड़ी हो सकती थी। हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि दोनों देशों ने तनाव को बड़े स्तर पर बढ़ने से रोकने के लिए कदम उठाए।
SIPRI ने अपनी रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया है कि मई 2025 के संकट के दौरान भारत और पाकिस्तान ने पहली बार सक्रिय सैन्य संघर्ष के बीच साइबर अभियानों का इस्तेमाल किया। संस्थान के अनुसार यह घटनाक्रम दोनों देशों के बीच युद्ध और प्रतिरोधक क्षमता की बदलती प्रकृति को दर्शाता है।
रिपोर्ट के अनुसार भारत दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा रक्षा व्यय करने वाला देश बना हुआ है। वर्ष 2025 में भारत का सैन्य खर्च 92.1 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 8.9 प्रतिशत अधिक है। रक्षा खर्च के मामले में भारत केवल अमेरिका, चीन, रूस और जर्मनी से पीछे है।
इसके साथ ही भारत वर्ष 2021-25 की अवधि में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हथियार आयातक भी रहा। SIPRI के अनुसार वैश्विक हथियार आयात में भारत की हिस्सेदारी 8.2 प्रतिशत रही। इस अवधि में यूक्रेन, भारत, सऊदी अरब, कतर और पाकिस्तान दुनिया के पांच सबसे बड़े हथियार आयातक देशों में शामिल रहे।
रिपोर्ट में वैश्विक परमाणु स्थिति पर भी चिंता व्यक्त की गई है। SIPRI के अनुसार वर्ष 2026 की शुरुआत में दुनिया के नौ परमाणु हथियार संपन्न देश अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन, भारत, पाकिस्तान, उत्तर कोरिया और इज़राइल के पास कुल मिलाकर लगभग 12,187 परमाणु हथियार मौजूद थे। इनमें से लगभग 9,745 सैन्य भंडार में रखे गए थे और संभावित उपयोग के लिए उपलब्ध माने जाते हैं।
SIPRI का कहना है कि परमाणु हथियारों की कुल संख्या में गिरावट मुख्य रूप से अमेरिका और रूस द्वारा पुराने वारहेड नष्ट किए जाने के कारण हो रही है। हालांकि नए परमाणु हथियारों के विकास और आधुनिकीकरण कार्यक्रमों की गति बढ़ने से वैश्विक स्तर पर परमाणु प्रतिस्पर्धा फिर तेज होती दिखाई दे रही है।
रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान भी नए हथियार वितरण प्रणालियों के विकास और विखंडनीय सामग्री के भंडारण को बढ़ा रहा है, जिससे आने वाले दशक में उसके परमाणु शस्त्रागार के विस्तार की संभावना जताई गई है। वहीं चीन का परमाणु भंडार भी बढ़कर लगभग 620 वारहेड तक पहुंचने का अनुमान व्यक्त किया गया है।
SIPRI के निदेशक करीम हग्गाग ने रिपोर्ट की प्रस्तावना में कहा कि पिछले एक दशक ने वैश्विक रणनीतिक वातावरण को पूरी तरह बदल दिया है। उनके अनुसार तकनीकी रूप से उन्नत देशों के बीच बड़े पैमाने के अंतरराष्ट्रीय युद्धों की वापसी और अमेरिका के पारंपरिक गठबंधन ढांचे में बदलाव वर्तमान वैश्विक प्रतिस्पर्धा की प्रमुख विशेषताएं बनकर उभरी हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में चीन और अमेरिका के बीच बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के कारण सुरक्षा परिदृश्य लगातार जटिल होता जा रहा है। ऐसे माहौल में भारत अपनी सैन्य क्षमताओं, रक्षा आधुनिकीकरण और रणनीतिक प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दे रहा है।
SIPRI की यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब वैश्विक स्तर पर सुरक्षा चुनौतियां, क्षेत्रीय संघर्ष और परमाणु प्रतिस्पर्धा नए आयाम ले रही हैं। रिपोर्ट के निष्कर्ष संकेत देते हैं कि आने वाले वर्षों में एशिया और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र वैश्विक रणनीतिक संतुलन का प्रमुख केंद्र बने रह सकते हैं।
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