सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में डी. राजा ने कहा, “न्याय और जवाबदेही की मांग को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से एकत्रित युवाओं को कानून-व्यवस्था की समस्या के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।”
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारी छात्रों पर वाटर कैनन, आंसू गैस और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया गया, जो पूरी तरह अस्वीकार्य है। उनका कहना है कि इस तरह की कार्रवाई छात्रों की नाराजगी और असंतोष को और बढ़ाएगी।
सीपीआई नेता ने राज्य सरकार से छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग तत्काल बंद करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार को प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ सार्थक बातचीत का माहौल बनाना चाहिए और उनके प्रतिनिधियों को संवाद के लिए बुलाना चाहिए।
उन्होंने जोर देकर कहा कि न्याय की मांग कर रहे छात्रों के प्रति सरकार की प्रतिक्रिया हिंसा नहीं, बल्कि संवाद और सहभागिता होनी चाहिए। सीपीआई का मानना है कि बातचीत के जरिए ही इस मुद्दे का शांतिपूर्ण और सकारात्मक समाधान निकाला जा सकता है।
वहीं, जेपीएससी आंदोलन के दौरान छात्रों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में भाजपा ने रांची शहर में अलग-अलग जगहों पर कई विरोध प्रदर्शन किए। भाजपा कार्यकर्ताओं ने रातू रोड पर प्रदर्शन किया और टायर जलाए। इस प्रदर्शन का नेतृत्व राज्य भाजपा अध्यक्ष आदित्य साहू ने किया।
इस बीच, झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र मंगलवार को भारी हंगामे और नारेबाजी के बीच निर्धारित समय से एक दिन पहले ही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे दोबारा शुरू होते ही विपक्षी सदस्यों ने जेपीएससी-जेएसएससी मामले को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी।
लगातार हंगामे के कारण सदन का संचालन मुश्किल हो गया। अंततः विधानसभा अध्यक्ष रवींद्रनाथ महतो ने मानसून सत्र की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की घोषणा की।



