देश 26 जुलाई 2025 को कारगिल विजय दिवस की 26वीं वर्षगांठ मनाने जा रहा है। इस मुक़द्दस अवसर से पहले भारतीय सेना ने 1999 के कारगिल युद्ध में शहीद हुए वीरों के परिजनों को सम्मानित करने के लिए एक विशेष आउटरीच कार्यक्रम आरम्भ किया है। अभियान का उद्देश्य कारगिल के नायकों के बलिदान को नई पीढ़ी तक पहुँचाना और उनके परिवारों को यह भरोसा दिलाना है कि देश उनका कर्ज़ कभी नहीं भूल सकता।
सेना मुख्यालय से जारी जानकारी के अनुसार, एक अधिकारी, एक जेसीओ और तीन अन्य रैंक वाले पांच सदस्यीय दल देश के कोने‐कोने में उन वीरों के पैतृक घरों तक पहुँचेगा, जिन्होंने कारगिल की ऊँचाइयों पर अपने प्राण राष्ट्र पर न्योछावर किए।
प्रत्येक परिजन को सेना की ओर से स्मृति चिह्न और जनरल ऑफिसर कमांडिंग द्वारा हस्ताक्षरित आभार पत्र सौंपा जाएगा। सेना का संदेश साफ़ है: “भारतीय सेना और समूचा राष्ट्र अपने वीरों को कभी भुला नहीं सकता।” अभियान का आग़ाज़ 13 जून को केरल के कन्नूर में हुआ, जहाँ कैप्टन आशुतोष तोमर के नेतृत्व में पहुँची टीम ने शहीद कैप्टन के. सी. प्रीतम कुमार (141 फील्ड रेजिमेंट) की माता प्रमिला बालाकृष्णन से भेंट की।
सेना ने स्मृति चिह्न और धन्यवाद-पत्र सौंपते हुए परिवार को आश्वस्त किया कि शहीद के अदम्य साहस और बलिदान की गाथा हमेशा प्रेरणा देती रहेगी। भावुक मुलाक़ात के दौरान पड़ोसियों और स्थानीय प्रशासन के प्रतिनिधियों ने भी पुष्पांजलि अर्पित की।
1999 में पाकिस्तानी घुसपैठियों द्वारा कारगिल की रणनीतिक चोटियों पर कब्ज़ा किए जाने के बाद भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन विजय’ चलाया। दुर्गम, बर्फ़ीले और ऊँचे मोर्चों पर लड़ी गई इस लड़ाई में 527 भारतीय जवान शहीद हुए, जिन्होंने अदम्य साहस से देश की सरहदें वापस सुरक्षित कीं। हर वर्ष 26 जुलाई को मनाया जाने वाला कारगिल विजय दिवस उन अमर जवानों की याद में समर्पित है, जिनकी शहादत ने भारतवासियों को एक सूत्र में बाँधकर देशभक्ति का जज़्बा और मज़बूत किया।
जानकारी के अनुसार यह आउटरीच कार्यक्रम केवल सम्मान तक सीमित नहीं रहेगा; प्रतिनिधिमंडल शहीदों के परिजनों से उनकी आवश्यकताओं, पेंशन एवं कल्याणकारी योजनाओं पर भी चर्चा करेगा। इसके साथ ही, स्थानीय स्कूलों और कॉलेजों में प्रेरक व्याख्यान तथा फोटो प्रदर्शनी आयोजित कर नौजवानों को राष्ट्रीय सेवा के लिए प्रेरित किया जाएगा।
कारगिल के शहीदों ने जिस ज़मीन पर अपने प्राण अर्पित किए, वहाँ आज भी तिरंगा उसी शान से लहराता है। भारतीय सेना की यह अभिनव पहल न केवल कर्तव्य पर जीवन न्योछावर करने वालों की याद ताज़ा करती है, बल्कि उनके परिजनों को यह भरोसा भी देती है कि राष्ट्र उनके साथ हमेशा खड़ा है। 26वीं वर्षगांठ पर शुरू किया गया यह अभियान आने वाले दिनों में देशभर में वीरता, एकता और ज़िम्मेदारी की भावना को और प्रबल करेगा
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