जम्मू-कश्मीर में कठुआ जिले में हाल ही में हुए बादल फटने से मची तबाही के बाद सरकार ने पीड़ित परिवारों के लिए राहत और मुआवजे की घोषणा की है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने जानकारी दी है कि मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। वहीं गंभीर रूप से घायलों को 1 लाख रुपये और मामूली रूप से घायलों को 50 हजार रुपये प्रदान किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “कठुआ में हाल ही में हुए बादल फटने से प्रभावित लोगों के जीवन और संपत्ति के प्रति गहरी चिंता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने एसडीआरएफ सहायता के अलावा मुख्यमंत्री राहत कोष से अनुग्रह राशि की घोषणा की है। प्रत्येक मृतक के लिए 2 लाख रुपये, गंभीर रूप से घायलों के लिए 1 लाख और मामूली रूप से घायलों के लिए 50 हजार रुपये दिए जाएंगे।”
आपदा में घरों को हुए नुकसान को लेकर भी मुआवजा तय किया गया है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने बताया कि पूरी तरह क्षतिग्रस्त घरों के लिए 1 लाख रुपये, गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त घरों के लिए 50 हजार रुपये और आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त घरों के लिए 25 हजार रुपये की सहायता दी जाएगी। सरकार का कहना है कि इस राहत का उद्देश्य प्रभावित परिवारों को तत्काल मदद पहुंचाना और उन्हें अपने जीवन को फिर से पटरी पर लाने में सहयोग करना है।
इस बीच केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने बताया कि घायलों को उचित अस्पतालों तक पहुँचाने के लिए हेलीकॉप्टर सेवाओं की व्यवस्था की गई है। सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “घायलों को उचित अस्पतालों में पहुँचाने के लिए हेलीकॉप्टर सेवाओं की व्यवस्था की गई है। 6 घायलों को पठानकोट के मामून अस्पताल में भर्ती कराने के लिए हवाई मार्ग से ले जाया गया है, जो यहां का नजदीकी स्थान है।”
उन्होंने यह भी बताया कि जम्मू-कश्मीर के डीआईजी शिव कुमार शर्मा घटनास्थल पर मौजूद हैं और उनके साथ लगातार संपर्क में हैं। सिंह ने कहा कि जरूरत पड़ने पर आगे की सहायता की भी व्यवस्था की जाएगी।
आपदा के बाद भारतीय सेना भी बचाव कार्य में सक्रिय हो गई है। सेना की राइजिंग स्टार कोर ने सोशल मीडिया पर लिखा, “कठुआ में बादल फटने के बाद भारतीय सेना की टुकड़ियां जमीन पर तैनात हैं, जो परिवारों को बचा रही हैं, उन्हें भोजन और देखभाल के साथ उम्मीद दे रही हैं।” सरकारी राहत, केंद्रीय मंत्री की निगरानी और सेना की सक्रियता ने आपदा प्रभावित इलाके में फंसे लोगों को तत्काल सहायता पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
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