पूर्वोत्तर राज्य मिजोरम 60 सालों बाद ऐतिहासिक मोड़ के साथ “विद्रोह-मुक्त” राज्य घोषित हो चूका है। राज्य के अंतिम सक्रिय उग्रवादी गुट ‘सनाटे गुट’ ने गुरुवार (30 अप्रैल) को हथियार डाल दिए, जिसके बाद मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने इस उपलब्धि की आधिकारिक घोषणा की।
यह घटनाक्रम उस समय सामने आया जब हमार पीपुल्स कन्वेंशन (डेमोक्रेटिक) [HPC(D)] के सनाटे गुट ने अपने 43 कैडरों के साथ आत्मसमर्पण किया। इस समूह का नेतृत्व लालह्मिंगथांगा सनाटे ने किया, जिसे मिजोरम का आखिरी सक्रिय उग्रवादी संगठन माना जाता था। आत्मसमर्पण समारोह आइजोल के पास सेसॉन्ग में आयोजित होमकमिंग और आर्म्स लेइंग कार्यक्रम के दौरान हुआ।
यह कदम 14 अप्रैल को मिजोरम सरकार और HPC(D) के बीच हुए शांति समझौते के बाद उठाया गया, जिसने राज्य में लंबे समय से जारी उग्रवाद के अंत का रास्ता साफ किया। मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने इस अवसर पर कहा, “पहले जब भी मिजोरम में शांति की बात होती थी, HPC(D) की छाया बनी रहती थी। आज हमने उस लक्ष्य को हासिल कर लिया है। अब हम गर्व से कह सकते हैं कि मिजोरम वास्तव में एक शांतिपूर्ण राज्य है।”
उन्होंने मिजो समुदाय की एकता पर जोर देते हुए कहा कि किसी भी उप-जनजाति की अलग पहचान से अधिक महत्वपूर्ण साझा मिजो पहचान है। उन्होंने कहा, “हम सभी मिजो हैं और हमारी तरक्की एकजुटता में ही है।” मुख्यमंत्री ने कहा कि मिजोरम अब दोबारा उग्रवाद को पनपने नहीं देगा। उन्होंने कहा, “हम सभी को मिलकर शांति बनाए रखनी होगी और ऐसे किसी भी विचार या गतिविधि से दूर रहना होगा जो अशांति को बढ़ावा दे।”
राज्य के गृह मंत्री के. सपदंगा ने इस दिन को ऐतिहासिक बताते हुए शांति प्रक्रिया में मुख्यमंत्री के भूमिका को सराहा। उन्होंने कहा कि सरकार आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों के साथ मिलकर उनकी आकांक्षाओं को लोकतांत्रिक और प्रशासनिक तरीकों से पूरा करेगी।
HPC(D) लंबे समय से संविधान की छठी अनुसूची के तहत हमार समुदाय के लिए स्वायत्त जिला परिषद (ADC) की मांग कर रहा था। यह संगठन 1980 के दशक में एक राजनीतिक मंच के रूप में उभरा, लेकिन 1987 में सशस्त्र संघर्ष की राह पर चला गया। 1994 में एक शांति समझौते के बाद इसका एक हिस्सा मुख्यधारा में आ गया, जबकि असंतुष्ट गुट ने अलग होकर HPC(D) का गठन किया।
बाद में 2018 में एक अन्य धड़े ने भी सरकार के साथ समझौता कर लिया, लेकिन सनाटे गुट शांति प्रक्रिया से बाहर रहा। 2024 से शुरू हुई बैक-चैनल वार्ताओं के बाद अंततः यह गुट भी मुख्यधारा में लौट आया। समारोह के दौरान सनाटे ने भी सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि क्षेत्र में विकास कार्यों ने विश्वास बहाल करने में अहम भूमिका निभाई।
बता दें की, मिज़ोरम में मानवीय हिंसा और उग्रवाद का दौर फरवरी 1966 को मिज़ो नॅशनल फ्रंट के साथ शुरू हुआ, जो 30 अप्रैल 2026 को 60 सालों बाद थमकर राज्य को ‘विद्रोह-मुक्त’ कर गया है। इस घटनाक्रम के साथ मिजोरम ने दशकों पुराने उग्रवाद के दौर को पीछे छोड़ते हुए स्थायी शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है।
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