मुंबई के देवनार लैंडफिल पर बन रहा वेस्ट-टू-एनर्जी (WTE) प्लांट अब अक्टूबर 2025 में तय समय पर शुरू नहीं हो पाएगा। परियोजना को आवश्यक वैधानिक मंज़ूरियों की कमी के कारण विलंब का सामना करना पड़ रहा है। ठेकेदार ने इसके लिए बीएमसी से समयावधि बढ़ाने की मांग की है। हालांकि, इसी बीच एक सकारात्मक पहलू यह भी सामने आया है कि महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPCB) ने प्लांट की क्षमता को दोगुना करते हुए 8 मेगावाट (MW) की मंजूरी दे दी है, जो पहले 4 मेगावाट तय थी।
मुंबई के सबसे पुराने और 1927 से चल रहे देवनार डंपिंग ग्राउंड पर करीब 2 करोड़ मीट्रिक टन पुराने कचरे का निपटारा करने के उद्देश्य से बीएमसी ने जून 2022 में 648 करोड़ रुपये की लागत से इस परियोजना की नींव रखी थी। छह साल की प्लानिंग के बाद यह प्रोजेक्ट चेन्नई एमएसडब्ल्यू प्राइवेट लिमिटेड को सौंपा गया। इसमें 40 महीने का निर्माण कार्यकाल और 15 साल का संचालन एवं रखरखाव अनुबंध शामिल है।
शुरुआत में इस संयंत्र को 4 मेगावाट बिजली उत्पादन के लिए डिज़ाइन किया गया था, लेकिन पर्यावरण संबंधी चिंताओं को देखते हुए बीएमसी ने योजना में बदलाव किया और इसे रोजाना 600 टन ताज़ा कचरा प्रोसेस कर 8 मेगावाट बिजली उत्पादन के लिए मंज़ूरी दी। बावजूद इसके, परियोजना अभी पर्यावरणीय मंज़ूरियों की देरी से अटकी हुई है।
मुंबई हर दिन लगभग 7,000 मीट्रिक टन कचरा उत्पन्न करता है, जो आकार में एक तीन मंज़िला इमारत के बराबर होता है। कूड़ा प्रबंधन प्रयासों के तहत गोरेगांव और मुलुंड के लैंडफिल को वैज्ञानिक तरीक़े से बंद कर दिया गया है, लेकिन 311 एकड़ में फैला देवनार डंपिंग ग्राउंड अब भी पुराने कचरे के बोझ से दबा हुआ है।
वर्तमान में कांजुर मार्ग ही शहर का एकमात्र सक्रिय लैंडफिल है, जहां अधिकांश दैनिक कचरा डाला जाता है, जबकि लगभग 10% कचरा अब भी देवनार पहुंचता है। पिछले वर्ष नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की विशेष ऑडिट रिपोर्ट में बीएमसी को परियोजनाओं की धीमी गति, आवश्यक मंज़ूरियों में असामान्य देरी और निगरानी की कमी के लिए कठघरे में खड़ा किया गया था।
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