मुंबई उच्च न्यायलय ने सरकार को दी डंपिंग ग्राउंड को बंद करने की चेतावनी

BMC को लगाई कड़ी फटकार

मुंबई उच्च न्यायलय ने सरकार को दी डंपिंग ग्राउंड को बंद करने की चेतावनी

Mumbai High Court warns government to close dumping ground

मुंबई उच्च न्यायालय ने शुक्रवार(24 अप्रैल) को एक बेहद सख्त रुख अपनाते हुए महाराष्ट्र सरकार और बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) को चेतावनी दी है कि यदि प्रदूषण और मीथेन उत्सर्जन को नियंत्रित करने के लिए तत्काल ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो अदालत कांजुरमार्ग डंपिंग ग्राउंड को पूरी तरह से बंद करने का आदेश दे सकती है। अदालत ने प्रशासन के लापरवाह रवैये पर गहरी नाराजगी व्यक्त की और स्पष्ट किया कि नागरिकों के स्वास्थ्य और उनके जीवन के अधिकार के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस आरती साठे की पीठ ने कहा, “हम एक विस्तृत आदेश पारित करेंगे… इस डंपिंग साइट को रोकने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।” पीठ ने आगे जोर देते हुए कहा, “अब समय आ गया है कि हम मानवीय जीवन को महत्व दें।”

अदालत ‘वनशक्ति’ नामक NGO और एक स्थानीय हाउसिंग सोसाइटी द्वारा दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। इन याचिकाओं में क्षेत्र में लगातार फैलने वाली दुर्गंध, गैस उत्सर्जन और निवासियों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले गंभीर खतरों का मुद्दा उठाया गया था।

वैज्ञानिक रिपोर्टों का हवाला देते हुए अदालत ने डंपिंग ग्राउंड से होने वाले मीथेन उत्सर्जन पर चिंता जताई। कोर्ट ने नोट किया कि मीथेन, कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में कहीं अधिक हानिकारक है। पीठ ने टिप्पणी की, “प्रशासन के कुप्रबंधन के कारण होने वाले ऐसे उत्सर्जन के बुरे प्रभावों के बारे में हमें नहीं पता।” अदालत ने अधिकारियों को उपलब्ध शोध का अध्ययन करने और वैज्ञानिक शमन उपाय अपनाने का निर्देश दिया।

अदालत ने इस साइट को “सबसे खराब डंपिंग ग्राउंड” करार देते हुए कहा कि दशकों से किए जा रहे अस्थायी उपाय परिणाम देने में विफल रहे हैं। कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि जब रिपोर्ट और सिफारिशें मौजूद थीं, तो उन्हें लागू करने में देरी क्यों हुई?

सुनवाई के दौरान जापान, सिंगापुर और यूएई जैसे देशों में उन्नत अपशिष्ट प्रबंधन प्रणालियों का अध्ययन करने के लिए प्रस्तावित दौरों का भी जिक्र आया। राज्य सरकार ने कहा कि ऐसे दौरे किए जा सकते हैं, लेकिन बेंच ने स्पष्ट किया कि विदेशी दौरों से पहले तत्काल स्थानीय कार्रवाई आवश्यक है। हाई कोर्ट ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि यदि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों के “जीवन के अधिकार” का उल्लंघन पाया गया, तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।

अदालत ने इसे प्रशासन के लिए अंतिम अवसर बताते हुए राज्य और नागरिक अधिकारियों को एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस हलफनामे में प्रदूषण रोकने और मीथेन उत्सर्जन की निगरानी के लिए उठाए गए कदमों का पूरा खाका देना होगा। इस मामले की अगली सुनवाई अब आने वाले सोमवार को होगी।

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