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Friday, November 6, 2026
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नई रिसर्चः केंचुए, पौधे और हाइड्रोपोनिक्स से साफ होगा उद्योगों का गंदा पानी

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केंद्रीय विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने उद्योग के गंदे पानी को साफ करने के लिए एक बेहद दिलचस्प और पर्यावरण-अनुकूल तकनीक विकसित की है। खास बात यह है कि इस सिस्टम में केंचुए, जलीय पौधे, सूक्ष्मजीव और बिना मिट्टी वाले पौधों की तकनीक यानी हाइड्रोपोनिक्स को एक साथ जोड़ा गया है।

NIT राउरकेला के वैज्ञानिकों ने डेयरी उद्योग के गंदे पानी को साफ करने के लिए यह तकनीक विकसित की है। दरअसल, पनीर, दही और चीज बनाने वाली फैक्ट्रियों से निकलने वाला पानी काफी प्रदूषित होता है। इसमें फैट, प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। जब यह पानी सीधे नदियों या तालाबों में पहुंचता है, तो पानी में ऑक्सीजन कम हो जाती है और जलीय जीवों के लिए खतरा पैदा हो जाता है।

अब तक इस्तेमाल होने वाली कई पारंपरिक तकनीकों में फिल्टर जल्दी जाम हो जाते थे। इसी समस्या को हल करने के लिए एनआईटी राउरकेला की प्रोफेसर प्रो. काकोली करार पॉल और शोधार्थी डॉ. प्रज्ञान दास ने एक बहु-स्तरीय जैविक सिस्टम तैयार किया है। खास बात यह है कि इस तकनीक को पेटेंट भी मिल चुका है।

इस सिस्टम के जरिए सबसे पहले गंदा पानी एक ऐसे रिएक्टर में जाता है जहां केंचुए और जलीय पौधे मौजूद रहते हैं। केंचुए बड़े जैविक कचरे को छोटे-छोटे हिस्सों में तोड़ देते हैं, जिससे सूक्ष्मजीव उन्हें आसानी से खत्म कर पाते हैं। वहीं पौधों की जड़ें फिल्टर को जाम होने से बचाती हैं। इसके बाद पानी रेत की परत से गुजरता है, जो उसमें मौजूद ठोस गंदगी को छान देती है।

तीसरे चरण में फ्लाई ऐश से बने पेलेट्स पानी में मौजूद फॉस्फोरस और अन्य प्रदूषकों को सोख लेते हैं। फिर पानी कंकड़ों की परत से गुजरता है, जहां लाभकारी सूक्ष्मजीव बची हुई गंदगी को साफ करते हैं।

इस प्रक्रिया का अंतिम चरण सबसे खास है। यहां पानी हाइड्रोपोनिक चैंबर में पहुंचता है, जहां पौधों की जड़ें सीधे पानी में रहती हैं। ये जड़ें पानी में ऑक्सीजन छोड़ती हैं, जिससे अच्छे बैक्टीरिया तेजी से बढ़ते हैं और प्रदूषण को और कम करते हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार, इस पूरे सिस्टम को प्रयोगशाला स्तर पर लगभग 10,000 रुपए की लागत में तैयार किया गया है।

यह प्रतिदिन करीब 30 लीटर डेयरी अपशिष्ट जल को साफ कर सकता है। जरूरत के अनुसार इसे बड़े स्तर पर भी विकसित किया जा सकता है। सबसे अच्छी बात यह है कि साफ किया गया पानी खेती में इस्तेमाल किया जा सकता है, क्योंकि उसमें उपयोगी पोषक तत्व जैसे फॉस्फेट मौजूद रहते हैं।

वहीं इस प्रक्रिया में उपयोग किए गए जलीय पौधों को पशु चारे, बायोगैस और बायोडीजल बनाने में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। यानी यह तकनीक सिर्फ गंदा पानी साफ नहीं करती, बल्कि ‘कचरे से संसाधन’ बनाने की दिशा में भी बड़ा कदम साबित हो सकती है।

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