पीएम मोदी की ‘रणनीतिक मौजूदगी’ ने पाक के झूठे दावों की खोली पोल!

दौरे के ज़रिए पीएम मोदी ने न केवल पाकिस्तान के झूठे प्रचार की पोल खुली, बल्कि भारत ने दुनिया को यह संदेश भी दे दिया कि उसका रक्षा तंत्र पहले से कहीं ज़्यादा मजबूत, तैयार और आत्मविश्वास से भरा हुआ है।

पीएम मोदी की ‘रणनीतिक मौजूदगी’ ने पाक के झूठे दावों की खोली पोल!

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आदमपुर एयरबेस पर अचानक हुई यात्रा न केवल भारत के सशस्त्र बलों का हौसला बढ़ाने वाली रही, बल्कि पाकिस्तान द्वारा फैलाए जा रहे दुष्प्रचार का भी करारा जवाब बनकर सामने आई। पीएम मोदी की वह तस्वीर, जिसमें वे वायुसेना के अधिकारियों को संबोधित कर रहे हैं और उनके पीछे मिग-29 के साथ पूरी तरह सुरक्षित S-400 एयर डिफेंस सिस्टम मौजूद है — अब एक प्रतीकात्मक और ठोस संदेश बन चुकी है।

बीते दिन पाकिस्तान ने दावा किया था कि उसके जेएफ-17 फाइटर जेट्स ने आदमपुर एयरबेस को निशाना बनाकर भारत के अत्याधुनिक रूसी S-400 सिस्टम को नष्ट कर दिया है। पाकिस्तानी मीडिया और सोशल मीडिया पर कथित सैटेलाइट इमेजरी भी चलाई गई, जिसमें कोई विस्फोट के चिन्ह, संरचनात्मक नुकसान या एयरबेस की सामान्य गतिविधियों में कोई अवरोध नहीं दिखा।

पीएम मोदी की आदमपुर यात्रा ने इन दावों को न सिर्फ खारिज किया, बल्कि भारत की सैन्य तैयारियों और आत्मविश्वास का सार्वजनिक प्रदर्शन भी किया। रक्षा विशेषज्ञ S-400 को भारत का “सुदर्शन चक्र” मानते हैं, और यह पूरी तरह सुचारू अवस्था में तस्वीरों में स्पष्ट दिख रहा है।

केंद्रीय मंत्री बंडी संजय कुमार ने एक्स पर लिखा, “सिर्फ प्रधानमंत्री का हमारे वीरों के साथ खड़ा होना ही काफी था — सच्चाई ने दुष्प्रचार को चुप करा दिया। यह एक मास्टरक्लास थी फैक्ट-चेकिंग की।”

पीएम मोदी की यह अनिर्धारित यात्रा भारत की दूसरी सबसे बड़ी वायुसेना बेस आदमपुर पर हुई, जो भारत-पाक सीमा से महज 100 किलोमीटर दूर है और हालिया ऑपरेशन सिंदूर के बाद से रक्षा कार्रवाई के केंद्र में रहा है। इस बेस ने पाक और पीओके में भारत के आतंकरोधी अभियानों के जवाब में दागे गए ड्रोनों और मिसाइलों को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट किया।

पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा, “यह मेरे लिए विशेष अनुभव रहा उन लोगों के साथ रहने का, जो साहस, संकल्प और निडरता का प्रतीक हैं। भारत हमेशा हमारे सशस्त्र बलों का ऋणी रहेगा।” आदमपुर का इतिहास भी इसका महत्व दर्शाता है — 1965 के भारत-पाक युद्ध में यह पाकिस्तानी हमलों का मुख्य लक्ष्य था, लेकिन तब भी यह अजेय रहा। आज भी यह भारत के उत्तरी हवाई सुरक्षा नेटवर्क की रीढ़ बना हुआ है।

इस दौरे के ज़रिए न केवल पाकिस्तान के झूठे प्रचार की पोल खुली, बल्कि भारत ने दुनिया को यह संदेश भी दे दिया कि उसका रक्षा तंत्र पहले से कहीं ज़्यादा मजबूत, तैयार और आत्मविश्वास से भरा हुआ है।

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