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Saturday, October 17, 2026
होमन्यूज़ अपडेट20,000 टन गैस लेकर ‘सिमी’ जहाज गुजरात के कांडला बंदर पहुंचा

20,000 टन गैस लेकर ‘सिमी’ जहाज गुजरात के कांडला बंदर पहुंचा

जहाज ने 13 मई को होर्मुज जलडमरूमध्य पार किया था

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मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच भारत की घरेलू रसोई गैस जरूरतों के लिए राहतभरी खबर सामने आई है। सिमी नामक एलपीजी मालवाहक जहाज, जिस पर मार्शल द्वीपसमूह का ध्वज लगा है, रविवार सुबह सफलतापूर्वक कांडला बंदरगाह पहुंच गया। इस जहाज ने 13 मई 2026 को होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर यात्रा की थी।

पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण पिछले 75 दिनों से यह समुद्री मार्ग पूरी तरह असुरक्षित और बाधित बना हुआ था। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन द्वारा रस लफ्फान टर्मिनल से खरीदे गए इस जहाज में लगभग 20,000 टन द्रवित प्रोपेन और ब्यूटेन (एलपीजी) भरा हुआ है। जहाज पर मौजूद सभी 21 विदेशी चालक दल के सदस्य सुरक्षित बताए गए हैं।

ओमान की खाड़ी में अमेरिकी नाकेबंदी और ईरान की नौसेना की कड़ी निगरानी के बीच जहाज को सुरक्षित रूप से निकालने के लिए अत्याधुनिक रणनीतिक कदम उठाने पड़े।

बुधवार को युद्ध क्षेत्र से गुजरते समय जहाज ने रडार की निगरानी से बचने के लिए अस्थायी रूप से अपना ऑटोमेटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) बंद कर दिया। इस रणनीति की मदद से जहाज रडार-निगरानी वाले संघर्ष क्षेत्र से बचते हुए लाराक द्वीप के पूर्वी हिस्से से सुरक्षित रूप से आगे बढ़ सका।

भारतीय सरकारी अधिकारियों के अनुसार, इस पूरे अभियान को सफल बनाने और जहाज को किसी भी संभावित टकराव से बचाने के लिए सरकार के चार मंत्रालयों के बीच उत्कृष्ट समन्वय रहा।

बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव मुकेश मंगल ने कहा, “डीजी शिपिंग, विदेश मंत्रालय (MEA), रक्षा मंत्रालय (MoD) और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के बीच चौबीसों घंटे समन्वय के कारण इस जहाज की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित हो सकी।”

मार्च की शुरुआत से भारत आने वाले जोखिमपूर्ण समुद्री मार्ग को पार करने वाला ‘सिमी’ 13वां जहाज है। इसके बाद NV सनशाइन जो वियतनाम के ध्वज वाला दूसरा एलपीजी टैंकर है, 46,427 टन ईंधन लेकर न्यू मैंगलोर बंदरगाह की ओर बढ़ रहा है।

रसोई गैस की यह खेप भारत के घरेलू बाजार के लिए जीवनरेखा साबित हो सकती है। पिछले 75 दिनों से पश्चिम एशियाई समुद्री मार्ग में व्यवधान के कारण भारत के कच्चे तेल और वाणिज्यिक गैस भंडार में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है।

भारत का राष्ट्रीय ऊर्जा भंडार लगभग 15 प्रतिशत घट गया है। कमोडिटी विश्लेषण कंपनी कप्लर के अनुसार, युद्ध शुरू होने से पहले भारत के पास 107 मिलियन बैरल कच्चे तेल का भंडार था, जो अब घटकर 91 मिलियन बैरल रह गया है।

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