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डिजाइन एक विधा होने के साथ-साथ एक कला भी है: अमित शाह!

फिर एनआईडी को यहां क्यों लाया गया? शायद इसका उद्देश्य यह था कि डिजाइन का संस्कार, जो कहीं न कहीं हर व्यक्ति में कम या ज्यादा मात्रा में होता है, उसे प्रोत्साहित किया जाए।

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केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने रविवार को गांधीनगर स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन में ‘इनोवेशन एंड इनक्यूबेशन सेंटर’ के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि एनआईडी के गांधीनगर कैंपस में आज इनक्यूबेशन और इनोवेशन सेंटर का उद्घाटन किया गया है।

अमित शाह ने कहा कि एनआईडी एक ऐसा संस्थान है जो रचनात्मकता, नवाचार और उद्यमिता को आपस में जोड़ता है। मेरा मानना ​​है कि जब एनआईडी की स्थापना हुई थी, तब इसके उद्देश्यों को बहुत ही सोच-समझकर तय किया गया था।

उन्होंने कहा कि 1961 में अहमदाबाद में एनआईडी की स्थापना हुई। अगर डिजाइन को पारंपरिक रूप से देखें तो यह एक विधा एक कला है, जो चीजों को बेहतर तरीके से प्रस्तुत करती है, उनकी उपयोगिता को एक स्पेस के अंदर व्यवस्थित करती है और उन्हें अधिक उपयोगी तथा आकर्षक बनाती है।

मैं कल रात सोच रहा था कि एनआईडी को 1961 में गुजरात में ही क्यों स्थापित किया गया। आमतौर पर गुजरातियों को कला से बहुत गहरा जुड़ा हुआ नहीं माना जाता, बल्कि उन्हें अधिकतर व्यापार और कमाई से जुड़ा माना जाता है।
फिर एनआईडी को यहां क्यों लाया गया? शायद इसका उद्देश्य यह था कि डिजाइन का संस्कार, जो कहीं न कहीं हर व्यक्ति में कम या ज्यादा मात्रा में होता है, उसे प्रोत्साहित किया जाए।

अमित शाह ने कहा कि एनआईडी का एक उद्देश्य यह भी रहा होगा कि जिन लोगों के मन में डिजाइन को लेकर कुछ खास है, उन्हें एक उचित प्लेटफॉर्म दिया जाए। इसलिए गुजरात में एनआईडी की स्थापना की गई।

उन्होंने कहा कि हर क्षेत्र में डिजाइन का विशेष महत्व है। चाहे कोई नया इंडस्ट्रियल पार्क बन रहा हो या किसी तकनीकी परियोजना का विकास हो, हर जगह डिजाइन की आवश्यकता होती है। हाई-टेक डिजाइन के क्षेत्रों में हमें आगे बढ़ना होगा।

सेमीकंडक्टर और चिप निर्माण जैसे क्षेत्रों में भी डिजाइन की महत्वपूर्ण भूमिका है। जिन युवाओं में डिजाइन के प्रति रुचि और प्रतिभा है, उन्हें सही दिशा और अवसर प्रदान करने का कार्य नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन को करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि डिजाइन एक विधा होने के साथ-साथ एक कला भी है। एनआईडी की स्थापना इस उद्देश्य से हुई कि किसी व्यक्ति के भीतर मौजूद डिजाइन संबंधी प्रतिभा और संस्कारों को एक उचित मंच प्रदान किया जाए तथा डिजाइन को एक सशक्त संस्कृति के रूप में विकसित किया जाए।

वहीं, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि मेरा मानना ​​है कि गांधीनगर में एनआईडी का होना बेहद उचित और उपयुक्त है। गुजरात की संस्कृति में उद्यमिता की जड़ें बहुत गहरी हैं। गुजरात के लोग हमेशा से ही नए अवसर तलाशने और हर क्षेत्र में जिसमें काम करने के नए तरीके और ‘डिज़ाइन थिंकिंग’ भी शामिल हैं। नवाचारी दृष्टिकोण अपनाने के लिए जाने जाते हैं।

उन्होंने कहा कि भारत के लिए नवाचार या डिजाइन थिंकिंग कोई नई बात नहीं है। हालांकि, औपनिवेशिक शासन सहित ऐतिहासिक पतन के लंबे दौर के कारण समय के साथ वह मूल सोच और नवाचार-उन्मुख मानसिकता काफी हद तक कमजोर पड़ गई।

डिजाइन थिंकिंग में हर पहलू की गंभीरता और गहराई को समझना तथा कार्यक्रमों को व्यवस्थित ढंग से लागू करना शामिल है। आप जैसे विशेषज्ञों के पास डिजाइन का गहरा ज्ञान होता है। भले ही हम इस क्षेत्र के विशेषज्ञ न हों, लेकिन मूल रूप से डिजाइन का अर्थ तर्क और स्पष्टता के साथ कुछ नया सृजित करना है।

उन्होंने कहा कि आज भारत की उद्यमिता की भावना साफ तौर पर दिखाई देती है। इसकी वजह यह है कि युवा अब केवल नौकरियों के पीछे नहीं भाग रहे हैं, बल्कि इनोवेशन और नई सोच के साथ अपने खुद के वेंचर भी बना रहे हैं। इस सफर में इनोवेशन के साथ-साथ ‘डिजाइन थिंकिंग’ भी बहुत अहम भूमिका निभाती है।

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