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Wednesday, October 28, 2026
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सूरत बनेगा भारत का पहला झुग्गी-झोपड़ी मुक्त शहर, आवासीय पुनर्विकास से बदली शहरी तस्वीर

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तेज़ी से बढ़ते शहरीकरण के बीच भारत के अधिकांश शहरों में आधुनिक इमारतों और अनौपचारिक झुग्गी बस्तियों के बीच गहरा अंतर लंबे समय से एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती रहा है। इसी पृष्ठभूमि में गुजरात का सूरत शहर एक राष्ट्रीय उदाहरण के रूप में उभर रहा है। डायमंड सिटी के नाम से पहचाना जाने वाला सूरत अब भारत का पहला झुग्गी-झोपड़ी मुक्त शहर बनने के बेहद करीब पहुंच गया है।

सूरत नगर निगम (SMC) ने केंद्र और राज्य सरकार की आवास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के जरिए शहर की अधिकांश झुग्गी बस्तियों को स्थायी आवास में बदल दिया है। प्रशासन का दावा है कि इस प्रक्रिया के पूरा होते ही सूरत देश का पहला ऐसा शहरी क्षेत्र होगा, जहां कोई भी निवासी स्लम में रहने को मजबूर नहीं होगा।

सूरत नगर निगम ने इस लक्ष्य को मिशन मोड में अपनाया है। शहर में मौजूद झुग्गी बस्तियों को उसी स्थान पर बहुमंज़िला आवासीय परिसरों में बदला जा रहा है, जिसे ‘इन-सिटू स्लम रीडेवलपमेंट’ कहा जाता है। इस मॉडल के तहत प्रभावित परिवारों को अस्थायी ढांचों के बजाय कानूनी और स्थायी आवास उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी नागरिक को असुरक्षित और अस्वास्थ्यकर हालात में न रहना पड़े।

पुनर्विकसित आवासीय परिसरों में टिकाऊ और पक्के फ्लैट, उचित जल निकासी और सीवेज व्यवस्था, पाइप से पीने का पानी, स्ट्रीट लाइटिंग और पक्की आंतरिक सड़कें उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके अलावा स्वच्छता, कचरा प्रबंधन और अन्य बुनियादी नागरिक सेवाओं तक भी निवासियों की पहुंच सुनिश्चित की गई है। इन सुविधाओं से स्वास्थ्य, सुरक्षा और जीवन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत शहरी आवास के लिए केंद्र सरकार की वित्तीय सहायता को गुजरात सरकार की आवास नीतियों से जोड़ा गया है। स्थानीय, राज्य और केंद्र स्तर पर बेहतर समन्वय के चलते सूरत में परियोजनाओं का क्रियान्वयन अपेक्षाकृत तेज़ी से हुआ है, जो इसे अन्य शहरों से अलग बनाता है।

झुग्गी-फ्री सूरत न केवल शहरी जीवन स्तर और सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार लाएगा, बल्कि सामाजिक असमानता और बहिष्करण को भी कम करेगा। इससे शहर की सुंदरता, भूमि उपयोग की दक्षता और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। साथ ही यह मॉडल देश के उन अन्य शहरों के लिए उदाहरण बन सकता है, जो झुग्गी पुनर्वास की समस्या से जूझ रहे हैं। यह पहल संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य 11 सतत शहर और समुदाय के अनुरूप भी है।

भारत में शहरी झुग्गियां मुख्य रूप से तेज़ ग्रामीण-शहरी पलायन, किफायती आवास की कमी और कमजोर शहरी नियोजन के कारण विकसित हुए हैं। इन्हीं चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी पहल शुरू की, जिसका लक्ष्य ‘सभी के लिए आवास’ सुनिश्चित करना है।

इन-सिटू स्लम रीडेवलपमेंट में झुग्गियों को उसी स्थान पर पुनर्निर्मित किया जाता है। इससे निवासियों को रोज़गार, स्कूल और सामाजिक नेटवर्क से दूर नहीं होना पड़ता, जिससे यह मॉडल अधिक व्यावहारिक और स्वीकार्य साबित होता है। सूरत का अनुभव दर्शाता है कि यदि नीति, प्रशासनिक इच्छाशक्ति और संसाधनों का सही तालमेल हो, तो शहरी स्लम की समस्या का स्थायी समाधान संभव है।

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