डांगी ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में बजट में की गई अनेक घोषणाओं को यह सरकार आज तक पूरा नहीं कर पाई। और अब एक बार फिर आने वाले वर्षों के लिए सिर्फ घोषणाओं का पुलिंदा पेश कर दिया गया है।
उन्होंने सदन में कहा कि यह बजट इस बात का प्रमाण है कि मोदी सरकार आज की समस्याओं का जवाब 2047 में ढूंढ रही है। 2014 से 2026 के बीच की जो नाकामियां हैं, वे इतनी बढ़ चुकी हैं कि सरकार के पास निकट भविष्य के लिए कोई ठोस रोडमैप नहीं बचा है। सिर्फ बड़ी-बड़ी बातें हैं, और वे बातें भी राजनीतिक कल्पनाओं से भरी हुई हैं।
नीरज डांगी ने कहा कि यह बजट आज युवा बनाम वादे साबित हो रहा है। देश आज बेरोजगारी, महंगाई और आय की असमानता जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। सरकार स्टार्टअप और स्किल की बात तो करती है, लेकिन सवाल यह है कि कितने स्थायी, सुरक्षित और सम्मानजनक रोजगार पैदा हुए।
उन्होंने कहा कि सरकारी भर्तियां लगभग ठप हैं। ठेका और अस्थायी नौकरियां बढ़ रही हैं। निजी क्षेत्र में न सुरक्षा है, न स्थिरता। यह बजट युवाओं को नौकरी नहीं, सिर्फ भाषण देता है। रोजगार पैदा करने के नाम पर पब्लिक कैपिटल एक्सपेंडिचर को सही ठहराया जा रहा है, लेकिन भारत का यह अभूतपूर्व कैपेक्स पुश सार्थक रोजगार सृजन में नाकाम रहा है। खर्च और नतीजों के बीच एक बुनियादी खाई साफ दिखाई देती है।
कांग्रेस सांसद ने कहा कि लगभग 2.8 करोड़ पढ़े-लिखे युवा सक्रिय रूप से बेरोजगार हैं। मनरेगा की बात करें तो देशभर में किसान और श्रमिक मनरेगा में किए गए बदलावों के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन उनकी मांगों को इस बजट में पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया।
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